बच्चों को अच्छी आदतें सिखा रहे हैं लेकिन कहीं ये तो नहीं भूल रहे?

बच्चों की सारी जिद पूरी करते हुए पेरेंट्स यह भूल जाते हैं कि उन्हें फाइनेंशियल ट्रेनिंग भी मिलनी चाहिए. पैसों के बारे में बात करना या बचत की प्रैक्टिस करवाना उनपर दबाव बनाना नहीं, बल्कि ये उनके फ्यूचर के लिए अच्छा है. जानें, बच्चों को फाइनेंशियली लिटरेट बनाने के कुछ तरीके.

बच्चों को किस उम्र में ये ट्रेनिंग मिलनी चाहिए, इसपर न उलझें. बच्चा जैसे ही बोलने और डिमांड करने लायक होता है, उसी समय से उसे ट्रेनिंग देनी चाहिए. बच्चों को अपने साथ बाजार ले जाएं और हर चीज की कीमत और उसके इस्तेमाल पर भी बात करें. बच्चा खुद समझेगा कि उसे उसी वक्त वो चीज चाहिए या नहीं.

पैसों के बचत की आदत बचपन से ही डलती है. उसे एक गुल्लक दें और हर सप्ताह या नियम बनाकर उसे पैसे जमा करने के लिए दें. उससे पूछें कि वो अपनी बचत के पैसों से क्या करना चाहता है. इसमें दखलंदाजी से बचें. बच्चा अगर थोड़ा बड़ा हो चुका है तो उसे बचत और निवेश में फर्क बताया जा सकता है. ये समझाते हुए आसान भाषा का इस्तेमाल करें. पैसों के बारे में बच्चे से कभी भी इस तरह से बात मत करें कि उसके भीतर हीनभावना जागे. उसे बताएं कि पैसे कमाने में कितनी मेहनत करनी होती है और उसे जाया नहीं किया जाना चाहिए.

बच्चे को किसी भी तरह की बात सिखाने से पहले खुद उसके लिए उदाहरण बनें. उसके साथ मिलकर बचत करें. उससे दिलचस्प तरीके से ये सारी बातें शेयर करें. इससे बच्चा बचत की आदत भी सीखेगा और निवेश को भी समझेगा. बच्चे में बांटने की आदत डालना भी फाइनेंशियल ट्रेनिंग का हिस्सा है. उससे खिलौने या दूसरी चीजें बांटने को कहें लेकिन अगर वो न देना चाहे तो जोर से अपनी बात न मनवाएं.

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