टीचरों ने बदली मां-बाप की सोच

कहते हैं जब इरादे मजबूत हो तो किसी भी काम को अंजाम तक पहुंचाना मुश्किल नहीं होता है। हालांकि कुछ दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ता है। अगर इन दिक्कतों का सामना डटकर कर लें तो मंजिल तक आसानी से पहुंच जाते हैं। ऐसा ही सराहनीय काम किया है बिंदुखत्ता के इंदिरा नगर गांव में स्थित राजकीय जूनियर हाई स्कूल के अध्यापकों ने।

कभी इस स्कूल में 5 छात्र हुआ करते थे लेकिन अध्यापकों की पहल से अब इस विद्यालय में 25 छात्र हैं। अध्यापकों ने यहां स्थानीय लोगों को जागरुक कर अपने वेतन से सहयोग कर स्कूल में ई-रिक्शा का भी इंतजाम किया है ताकि दूर-दराज के बच्चे स्कूल आसानी से पहुंच सके। सच में अगर ऐसे अध्यापक हर गांव के एक विद्यालय में हो तो वहां की तस्वीर खुद ही बदल जाएगी।

गौरतलब है कि छात्रों की संख्या कम होने के चलते स्कूल बंद होने की कगार पर था। जिसके चलते स्कूल के टीचर भी चिंतित थे, लेकिन अध्यापकों की मेहनत के चलते यह स्कूल बंद नहीं हुआ। अब दिन-प्रतिदिन स्कूल में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिससे सभी के चेहरे खिल गए हैं।

अध्यापकों की इस पहल ने 5 छात्रों वाले इस जूनियर हाई स्कूल में 25 नए छात्रों का दाखिला करा लिया है और अध्यापकों के अनुसार उन्होंने 100 छात्रों का दाखिला कराने का लक्ष्य रखा है। अध्यापकों की यह पहल अन्य अध्यापकों के लिए भी प्रेरणादायक है। क्योंकि अगर यह पहल हर अध्यापक करे तो बच्चों को शिक्षा मिलने के साथ ही सोसाएटी में आसानी से परिवर्तन लाया जा सकता है क्योंकि शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम जो सोच के साथ ही समाज को बदलने की क्षमता रखती है।