स्वच्छता के प्रति व्यवहारगत परिवर्तन लाना अनिवार्य

देहरादून। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत निर्देशों के क्रम में शासन द्वारा सभी जिलाधिकारियों को स्वच्छ भारत मिशन, अमृृत, हाउसिंग फार आल एवं राष्ट्रीय शहरी आजीविक मिशन के लिये जनपद स्तरीय नोडल अधिकारी नामित किया गया है। इस संबन्ध में शहरी विकास विभाग की सचिव श्रीमती राधिका झा ने सभी जिलाधिकारियों को अपने जनपदों के नगर आयुक्तों/अधिशासी अधिकारियों के साथ साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश दिये है।

सचिव श्रीमती झा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत स्वच्छता सर्वेक्षण 4 जनवरी, 2018 से कराया जाना प्रस्तावित है। जिसके तहत शहरों को स्वच्छता के विभिन्न मापदंडों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाएगा। उक्त स्वच्छता सर्वेक्षण में भारत वर्ष के समस्त नगर निकाय प्रतिभाग कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य की रैंकिंग पूर्ववर्ती स्वच्छता सर्वेक्षण में संतोषजनक नहीं रही है। अतः उक्त के दृष्टिगत आगामी प्रस्तावित स्वच्छता सर्वेक्षण में राज्य की बेहतर परफारमेंस/रैंकिंग हेतु आवश्यक है, कि स्वच्छता के निर्धारित मानकों की समयबद्ध पूर्ति के प्रयोजनार्थ निकायवार/क्षेत्रवार प्रभावी कार्य योजना तैयार कर ली जाए। जिसका तत्काल क्रियान्वयन एवं साप्ताहिक आधार पर नियमित समीक्षा अनुश्रवण भी सुनिश्चित किया जाए।

सचिव श्रीमती झा ने जिलाधिकारियों कहा है कि भारत सरकार द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण से संबंधित मार्गदर्शिका भी जारी की गई है। इस महत्वपूर्ण मिशन के लिए व्यापक जन सहभागिता एवं जन सामान्य में स्वच्छता के प्रति व्यवहारगत परिवर्तन लाना नितांत अनिवार्य है। अतः इस हेतु यथावश्यक प्रभावित जन-जागरूक एवं प्रचार प्रसार गतिविधियां संचालित करें।

सचिव राधिका झा ने बताया कि राज्य में उत्तराखंड कूड़ा-करकट एवं थूकना प्रतिषेध नियम अधिनियम-2016 लागू हो चुका है। जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी किए जाने पर व्यापक अर्थ दंड व चालान के प्राविधान निहित है। उक्त अधिनियम का व्यापक प्रचार प्रसार करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रयास सुनिश्चित करने के निर्देश भी डीएम को दिये गये है। इसके साथ ही निकायों के साथ बैठक कर निकायवार अर्थदण्ड व चालान के लक्ष्यों का निर्धारण करते हुए नियमित समीक्षा व उसका अनुश्रवण करना सुनिश्चित किया जाए।