सट्टे के सहारे वारे-न्यारे

सट्टे-जुए को अनुमति देने की सिफारिश मिलते ही देश की पहली ‘सार्वजनिक सट्टा बैंक की शाखा शहर में खुलने जा रही है। इसकी शाखा के उद्घाटन के लिए एक बड़े राजनेता राजधानी से पधारे। उन्होंने रिबन काटकर ‘सार्वजनिक सट्टा बैंक का लोकार्पण किया। फिर बोले-मित्रों, आपके शहर में सर्वप्रथम अपने देश की प्रथम ‘सार्वजनिक सट्टा बैंक की शाखा आरंभ हुई है। मैं बताए देता हूं कि जिस प्रकार हमने शासकीय शराब की दुकानें देश के हर शहर, गांव और कस्बे में खोली हैं, उसी प्रकार हमारा लक्ष्य है देश भर के हर शहर, गांव और कस्बे के हर एक मोहल्ले में सार्वजनिक सट्टा बैंक खोलना। इस बैंक की शाखा खोलने के लिए हमें युवकों की आवश्यकता होगी। इससे हजारों बेरोजगार युवकों को इस क्षेत्र में रोजगार मिल सकेगा।

सट्टा बैंक के खुलने से आम आदमी को यह राहत मिलेगी कि उसे किसी से ‘दबे-छुपे सट्टा लगाने नहीं जाना पड़ेगा। दूसरे, सार्वजनिक सट्टा बैंक की शाखा हर मोहल्ले में होने से उसे सट्टा लगाने ज्यादा दूर भी नहीं जाना पड़ेगा। फिर जिस किसी का सट्टा खुलेगा, उसे अपनी ‘बलन सीधे बैंक के काउंटर पर ही मिल जाया करेगी।

फिलहाल आपको मिलने वाली बलन की राशि को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने की व्यवस्था की गई है। यह तो हुई सट्टा खुलने की बात। यदि आपका सट्टा नहीं भी खुलता है तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपकी यह राशि जो पहले चंद निजी लोगों की जेबों में चली जाती थी, अब वह सीधे शासकीय खाते में जाएगी और उसे देश के विकास कार्यों पर खर्च किया जा सकेगा। यदि यह बैंक कामयाब हो जाता है तो भविष्य में हम इसी बैंक के माध्यम से सट्टा लगाने के लिए ‘लोन देने की भी व्यवस्था करेंगे।

मित्रों, जब हमारे देश के ‘मेहनतकशों की ईमानदारी से कमाई आय इस बैंक में आएगी तो इससे हमारे देश की विकास दर (जीडीपी) यकीनन बहुत बढ़ेगी। इस बैंक में देशभर की युवतियां और महिलाएं भी अपना योगदान दे सकेंगी। हम महिलाओं को अधिकाधिक सट्टा लगाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु ‘सार्वजनिक महिला सट्टा बैंक खोलेंगे, जिसमें सभी महिला कर्मचारी ही कार्यरत होंगी।

सार्वजनिक सट्टा बैंक खुलने पर दलालों को सट्टे से मिलने वाला लाखों रुपयों का कमीशन अब शासन के खाते में जाएगा, जिसका उपयोग हम देश के सर्वांगीण विकास में लगाने के लिए संकल्पबद्ध हैं।