सिर्फ सेल्फी वाली कार

हार्ले डेविडसन की बाइक लाखों में आती है। कई कारों की कीमत करोड़ों में है। पर दिल्ली में या किसी भी बड़े शहर में बहुत जल्दी इनका इस्तेमाल सिर्फ इनके साथ सेल्फी लेने के लिए ही होगा। इन पर सड़कों पर चलना मुश्किल हो रहा है।

दिल्ली में सुबह नौ बजे के आस-पास किसी भी व्यस्त इलाके में कारों का इतना लंबा रैला लगता है कि कोई स्मार्ट बंदा इस रैले का इस्तेमाल फोटोशॉप के साथ करके बहुत कुछ हासिल कर सकता है। हजारों कारों की लाइन को बताया जा सकता है- अच्छे दिनों के इंतजार में रैली करने वालों को भीड़।

हालांकि भाजपा के संबित पात्रा के पक्ष में फोटो शॉप करके इस भीड़ को मोदी समर्थक भी बताया जा सकता है। वैसे संबित पात्रा यह भी कह सकते हैं कि मोदीजी के कुशल नेतृत्व में लोग कारों में बैठकर अच्छे दिनों का इंतजार कर रहे हैं, पहले तो अच्छे दिनों का इंतजार पैदल चलकर किया जाता था।

खरबों की हैसियत का बंदा भी आम सड़क का होकर रह गया है। तीन घंटे दफ्तर जाने में, तीन घंटे दफ्तर से आने में। सड़कों पर धुंध है, इस कदर धुंध है कि बंदा पकड़े जाने के खौफ के बगैर आशिकी, जेबकटी और लघुशंका तक कर सकता है। कार है, धुंध है, आशिकी है, जेबकटी है, इसे दूसरे शब्दों में विकास की पराकाष्ठा भी कह सकते हैं।

विकास जब पराकाष्ठा पर पहुंच जायेगा, तो बंदा घर के दरवाजे से भी एक इंच कार को आगे न बढ़ा पायेगा। फिर करेंगे क्या कार का, जी उसके साथ सेल्फी लेकर फेसबुक पर पोस्ट कर दीजिये, रिश्तेदारों और दोस्तों को जलाइये। चार करोड़ की कार चार सेल्फी के ही काम आनी है।