व्यंग्य : तूफान जारी है…

ललित शौर्य

तूफान का टशन टॉप पर है। तूफान हमेशा रौब के साथ ही आता है। उसकी फितरत ही रौबीली है। फनफनाता हुवा आता है और सनसनाता हुवा निकल लेता है। हर बार जरूरी नहीँ की तूफान की भविष्यवाणी मौषम विभाग कर ही दे। कभी भविष्यवाणी के बाद भी मुवां तूफान झाँकने तक नहीँ आता। पेड़ की पत्तियों की मजाल जो हिल जाएं। और कभी -कभी बिन बताये बिलबिलाता हुवा बिलख पड़ता है। पेड़ की टहनियों ,घर की छप्पर को उड़ा कर सातवें आसमान में पटक मारता हैं ।

तूफान का कोई ठिकाना नहीँ। और भरोसा भी नहीँ। कब किसके ठिकाने की वाट लगा दे। तूफान के भी कई प्रकार होते हैं। किस्म-किस्म के तूफान पाये जाते हैं। जिंदगी में तूफान लाने के लिए छोटी-छोटी हरकते ही काफी होती हैं। परीक्षा में नकल करते हुए पकड़े गए तो तूफान। किसी विषय में लुढ़क गए तो घर में तूफान। ऑफिस लेट पहुंचे तो तूफान। घरवाली के सामने बाहर वाली का मैसेज आ गया तो तूफान। संसद में विपक्ष का तूफान। चुनावी तूफान। आईपीएल का तूफान। पुलिसिया रौब का तूफान।

सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों का तूफान। इस चराचर जगत में मनुष्य तूफानों से घिरा है। तूफान से पीड़ित है। हर पल तूफान उसका शोषण कर रहा है। वो चिंतित रहता है कि कब कौन सा तूफान उसकी जिंदगी में आ जाये, और हौले-हौले उसके परखच्चे उड़ा दे। जब बन्दा कुँवारा होता है तो छोटे-मोटे तूफान उसे सताते हैं। वो उन तूफानों को हँसी-ख़ुसी झेल भी लेता है। पर शादी नाम का तूफान जैसे ही लाइफ में एंट्री मारता है तो वो रुकने का नाम ही नहीँ लेता। और बाकायदा इस तूफान को घर वाले सगे सम्बन्धी एन्जॉय करते हैं। जिस दिन इस तूफान की एंट्री होती है सब खूब नाचते गाते और उछलते-कूदते हैं।

लड्डू-पेड़े बाटें जाते हैं। पर जो इसे झेलता है वही जानता है कि इस तूफान में पतंग उड़ती भी है और उलझती भी है। तूफान तो अनकहे आता है। कुछ जानबूझ कर तूफानी करते हैं। जैसे नेता अपने बयानों से तूफान खड़ा करते हैं। उसके बाद उस तूफान का इफेक्ट उनकी पार्टी को झेलना पड़ता है। नेताजी बचपन से ही तूफानी होते हैं। वो पड़ोसी के हिस्से का तूफान भी खुद झेल लेते हैं। देश में आने वाला तूफान भी छाती चौड़ी कर के झेल लेते हैं। उनको बड़े -बड़े बजट झेलने की आदत है।

पुल, हाइवे, बांध, सड़क, अस्पताल झेलने की आदत है । तूफान उनके बायें हाथ का खेल है। वो मुँह खोलते ही तूफान पैदा कर देते हैं। तूफान की वैरायटी अलग-अलग है। देश में प्रायोजित तूफान भी खड़े किये जाते हैं। असहिष्णुता का तूफान कुछ वैसा ही था। और भी अनेक ऐसे अनेक तूफान हैं जो अपनी सहूलियत के हिसाब से पैदा किये जाते हैं। हिन्दू-मुस्लिम का तूफान, जातिवाद का तूफान। ये ऐसे तूफान हैं जिनका समय तय है। ये तूफान चुनाव के समय पैदा किये जाते हैं। हमें तो तूफान झेलने की आदत सी है। आप भी तूफान झेलने की आदत डालिये। कब किस मोड़ पर कौन सा तूफान टकरा जाए, क्योंकि तूफान जारी है….