पत्रकार पिता-फत्र का महाप्रयाण

वरिष्ठ पत्रकार डाॅ. उमा शंकर थपलियाल हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका हमें लिखा अंतिम पत्र उनकी भावनाओं-चिंताओं व इस देवभूमि के दर्द को बयां करता है। अपनी मृत्यु से करीब एक सप्ताह पूर्व वे यहां देवभूमि समाचार के सम्पादकीय कार्यालय में आये थे। सोमवार 9 फरवरी को स्व. थपलियाल ने पत्रिका कार्यालय में देवभूमि समाचार के प्रवेशांक को बांचा तथा एक प्रति अपने साथ ले गये। पत्रिका बांचने के बाद उन्होंने हमें प्रतिक्रिया स्वरूप एक पत्र दिया। उस समय क्या पता था कि थपलियाल जी आठ दिन बाद यह संसार छोड़कर चल देंगे। उनके परिवार पर 17 फरवरी को जो हृदय विदारक घटना घटित हुयी, उसमें हम भी बेहद दुखी हैं। हम उनके युवा फत्र पत्रकार भवानी शंकर थपलियाल व उन्हें हृदय से श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इसके साथ ही दुख भी इस घड़ी में हम सब उनके परिवार के साथ खड़े हैं। ईश्वर दोनों दिवंगतजनों को शान्ति प्रदान करें।

Marc 10 (15)दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर थपलियाल ने देवभूमि समाचार को लिख पत्र में कहा है कि पत्रिका का प्रवेशांक अच्छा लगा। पत्रिका में उठायी समस्याओं को इंगित करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘‘हम लोग जो पहाड़ की समस्यायें उठा रहे हैं, लेकिन सरकारी तंत्र के बेलगाम होने के कारण हमारी समस्यायें जस की तस हैं बल्कि पहले से ज्यादा हो गयी हैं। पलायनवाद बढ़ गया है। इसके लिए राजधानी के लिए हमें प्रयास करना चाहिए।’’ देहरादून की राजधानी को वह ठगुआ राजधानी कहते हैं। वह स्पष्ट कहते हैं कि ‘‘यह ठगुआ राजधानी कब तक रहेगी।’’ प्रदेश के पत्रकारों में बढ़ती गुटबाजी, असामाजिकता, राजनीतिकरण आदि पर उन्होंने हमसे चिंता तो व्यक्त की साथ ही पत्र में लिखा कि ‘‘हम कलम के सिपाहियों का काम तो लिखना है। अब हमें लामबंद होकर अपनी आवाज को संगठित होकर आगे आना होगा।’’ उन्होंने प्रदेश से निकल रही अर्जी-फर्जी पत्रिकाओं की बढ़ती बाढ़ के बारे में चर्चा की, साथ ही यह भी कहा कि स्तरीय मासिक पत्रिका निकालना बेहद मुश्किल हैं। स्व. थपलियाल काफी देर तक विभिन्न विषयों पर चर्चा करते रहे और अंत में हमें प्रवेशांक की बधाई देकर विदा हो लिये। वार्ता के दौरान हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय परिसर बादशाही थौल टिहरी के हिन्दी विभाग के डाॅ. सुरेन्द्र जोशी भी मौजूद थे। उस दौरान हमें क्या पता था कि जिस वरिष्ठ पत्रकार के साथ हम बात-चीत कर रहे हैं वो बातें व उनका वह पत्र हमारे लिये अंतिम होगा।

मंगलवार 17 फरवरी को करीब साढ़े 6 बजे वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर थपलियाल के 42 वर्षीय फत्र भवानी शंकर थपलियाल जो कि मासिक रीजनल रिपोर्टर के सम्पादक थे। उनके सीने में दर्द की शिकायत हुयी। वह स्वयं अपनी कार चलाकर पत्नी गंगा असनोड़ा थपलियाल के साथ बेस अस्पताल पहुंचे। करीब आधे घण्टे बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी। बेटे का हालचाल पूछने जब 75 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर थपलियाल अस्पताल पहुंचे तो बेटे की मौत की खबर सुनकर सदमें में चले गये। उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया। करीब आधे घण्टे के बाद उनकी भी मौत हो गयी। पत्रकार भवानी शंकर थपलियाल अपने पीछे पत्नी गंगा असनौड़ा थपलियाल तथा एक फत्र और फत्री छोड़ गये हैं। जबकि डाॅ उमा शंकर थपलियाल एक बेटा, दो विवाहित बेटियां तथा पत्नी को छोड़ गये हैं। पिता-फत्र दोनों को अंतिम संस्कार डाॅ उमा शंकर थपलियाल को छोटे फत्र काली शंकर थपलियाल ने पैतृक घाट अल्केश्वर में किया। अंतिम संस्कार के दौरान सैकड़ों की तादाद में लोग मौजूद रहे।