राजधानी में पानी के सौदागर

extra-waterrrrrwaterदेहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने भले ही राज्य में जल संचय को लेकर अपने कदम आगे बढाये हों लेकिन राजधानी में आज भी खुलेआम पानी के दर्जनों सौदागर सरकार को खुली चुनौती देकर अपने काले कारोबार को अंजाम देने में लगे हैं। जहंा जल संचय करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है वहीं बडे-बडे काम्पलैक्सों व मॉल के निर्माण में पानी सौदागरों के दर्जनों टैंकर दिन-रात वहां दौडते हुए नजर आ रहे हैं ऐसे में सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार जिल प्रशासन इन पानी के सौदागरों पर कब नकेल लगायेगा जो कि अपने निजी ट्यूबवैल से रात-दिन पानी का सौदा करते हुए नजर आ रहे हैं।

उत्तराखण्ड सरकार ने आज तक पानी के सौदागरों पर नकेल लगाने के लिए कोई बडी पहल नहीं की और ना ही पानी के टैंकरों पर उसने कोई टैक्स लगाने के लिए आज तक कोई खाका बनाया जिसके चलते शहर के अन्दर ही काफी संख्या में पानी के सौदागर बडे-बडे निर्माणाधीन कॉम्पलैक्स व इमारतों पर अपने पानी के टैंकर बेचते नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल खडा हो रहा है कि एक ओर तो सरकार के मुखिया पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए आवाम व अफसरों को आदेश दे रहे हैं वहंी पानी के सौदागर निर्माणाधीन इमारतों के यहां 500 से लेकर 600 रूपये का (300 लीटर का) एक टैंकर बेच रहे हैं। ऐसे पानी के सौदागर प्रशासन को क्यों नजर नहीं आते यह काफी हैरान करने वाली बात है।

सवाल यह भी खडे हो रहे हैं कि आज तक पानी के सौदागरों पर सरकार ने कोई भी टैक्स लगाने के लिए अपने कदम आगे क्यों नहंी बढाये जिससे कि पानी के सौदागरों के द्वारा पानी से कमाये जा रहे पैसों का कुछ हिस्सा उसके खजाने में भी पहुंच सके। गर्मियों के मौसम में राजधानी के अन्दर वैसे ही पानी की किल्लत रहती है ऐसे में पानी के सौदागरों द्वारा हर दिन राजधानी के निर्माणाधीन इमारतों में हजारों लीटर पानी बेचना सरकार के जल संचय की मुहिम पर एक बडा ग्रहण है? ऐसे में सरकार को मंथन करना होगा कि सिर्फ शौचालयों में पानी की बरबादी पर रोक लगाना ही उसका मिशन नहीं होना चाहिए बल्कि जो पानी के सौदागर सरकार को खुली चुनौती देकर गर्मियों के मौसम में पानी से सोना पैदा करने का खेल खेल रहे हैं उन पर कैसे नकेल लगाई जाये।