पुनर्वास प्रक्रिया के व्यापक समाधान

चम्पावत। पंचेश्वर बांध परियोजना के अन्तर्गत प्रभावित परिवारों के पुनर्वास नीति पर जिला कार्यालय सभागार में हुई बैठक में जिलाधिकारी डा.अहमद इकबाल ने उपस्थित अधिकारियों आदि से सुझाव मांगे हैं। लोगों ने कहा कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास संबंधी नीति पर प्रभावित व्यक्तियों की सक्रिय भागीदारी के साथ विस्थापन से प्रभावित परिवारों को आर्थिक मुआवजे के अलावा अतिरिक्त लाभ भी दिये जाएं साथ ही उन परिवारों का विशेष ध्यान रखा जाएं जो दूसरों की भूमि से अर्जन करने के साथ दूसरों के भवन में रह रहे हैं।

बैठक में अधिकारियों ने विस्थापन से हो रहे आर्थिक नुकसान, सामाजिक प्रभाव को दूर करने हेतु उचित मुआवजा व भूमि पर अधिकार प्रदान करने के साथ सामाजिक प्रभाव को दूर करने हेतु प्रभावित लोगों को एक साथ ही एक ही स्थान पर पुनर्वास करने के सुझाव दिये। अधिकारियों ने बैठक में सुझाव दिये कि पुनर्वास प्रक्रिया को सुदृढ़, सशक्त, पारदर्शी बनाने के साथ व्यापक समाधान हेतुु प्रभावित क्षेत्र में जाकर लोगों के सुझाव लिए जाएं और नीति में उनके सुझावों को सम्मिलित करने के साथ उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए और पर्याप्त पुनर्वास पैकेज दिया जाए।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि विस्थापन से सबसे अधिक महिलाएं एवं बच्चे प्रभावित होते हैं इसलिए प्रभावित क्षेत्र के विद्यार्थियों हेतु बार्डिंग स्कूलों की स्थापना करने के साथ उनको तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाए जिससे परियोजना में उनको आजीविका से जोड़ा जा सके। बैठक में सुझाव प्राप्त हुए कि प्रभावित परिवारों को उनकी आवश्यकता के अनुसार आजीविका को चलाने हेतु प्रतिमाह धनराशि देने के साथ प्रत्येक परिवार के एक व्यक्ति को आजीविका से जोड़ा जाए।

जिलाधिकारी ने पुनर्वास में अर्जित होने वाली भूमि का क्षेत्रफल, गांव, परिवार, जनसंख्या, स्वामित्व वाली भूमि, अचल संपत्ति का स्वरूप, कृषि श्रमिक, कृषि आधारित कृषकों की संख्या व भूमि का क्षेत्रफल, रोजगार से विस्थापन होने वाले व्यक्ति, शिल्पकारों, गैर कृषि श्रमिकों, बीपीएल परिवार, भूमिहीन परिवार, सार्वजनिक व सरकारी भवनों की संख्या व भूमि, जन सुविधाओं की सूची उपलब्ध कराने के साथ प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली सुविधाओं, संरचनाओं का ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा।

जिलाधिकारी ने अवगत कराया कि पुनर्वास नीति के अंतर्गत प्रभावित परिवार जिसके पास अपना घर था को प्रत्येक एकल परिवार के लिए 250 वर्गमीटर भूमि का प्लांट आवास निर्माण हेतु बिना किसी लागत के आवंटित करने के साथ आवंटित क्षेत्रफल के 50 प्रतिशत भूमि के बराबर नागरिक सुविधाओं और आधारभूत ढ़ांचागत सुविधाओं हेतु उपलब्ध होगा। भवन निर्माण हेतु 10 लाख और 20.9 प्रतिशत वृद्धिकारक की दर से चार किश्तों में भवन निर्माण में सहायता दी जायेगी। गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी के परिवार को जिनके पास वास भूमि नहीं है और प्रभावित क्षेत्र की घोषणा की तारीख से पहले तीन वर्षो से अन्यून अवधि से लगातार प्रभावित क्षेत्र में रह रहा हो को कम से कम 50 वर्गमीटर का घर महैया कराया जा सकता है।

प्रभावित कृषि भूमि के परिवार को वास्तविक क्षति के 50 प्रतिशत के बाराबार कृषि भूमि आवंटित होगी जो आवंटित कृषि भूमि 2000 वर्गमीटर से न्यून नहीं होगी। पुनर्वास नीति के अंतर्गत ऐसे प्रभावित परिवार जिन्होंने करार (बेनामा), उपहार दुरभिसंधि पूर्ण मुकदमों आदि के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास हेतु राज्य सरकार द्वारा गठित ‘‘राज्य पुनर्वास प्राधिकरण’’ की स्थापना की तिथि (11.07.2017) के बाद भूमि अर्जित की हो, पुनर्वास नीति के अनुसार भूमि आवंटन के हकदार नहीं होंगे साथ ही कृषि भूमिहीन श्रमिक भी जिन्होंने 11.07.2017 के पश्चात अपनी भूमि बेच दी हो अथवा खरीदी हो भूमि आवंटन के पात्र नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि पुनर्वास नीति के अनुसार यदि प्रभावित परिवार नाप भूमि के अतिरिक्त नजूल भूमि, वर्ग-4 की भूमि एवं पट्टे की भूमि के स्वामी है तो उनको भी उक्त भूमि के विस्थापन के लिए नाम भूमि दरों की भांति प्रतिपूर्ति एवं अन्य लाभ देय होंगे। उन्होंने वृक्षों की क्षतिपूर्ति, दुकानों का मुआवजा, निर्वाह भत्ता एवं अन्य लाभों के संबंध में चर्चा की और सुझाव आंमंत्रित किये।