एनडीटीवी पर एक दिन का बैन मात्र संकेत है

अभी इस चैंनल की फाइल पीएमओ में लंबित पड़ी है

RBL Nigamआर.बी.एल.निगम, दिल्ली ब्यूरो चीफ

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पैनल के एनडीटीवी इंडिया न्‍यूज चैनल को एक दिन के लिए ऑफ एयर करने की सिफारिश (हालां‍कि एनडीटीवी का कहना है किे उसे आदेश मिल गया है।) पर काफी हंगामा हो रहा है। भारत में किसी टीवी चैनल को ऑफ एयर करने की यह पहली सिफारिश/आदेश नहीं है। पिछले 10 साल में प्रसारण के नियमों का उल्‍लंघन किए जाने पर 28 बार टीवी चैनलों को ऑफ एयर किया गया है। ज्‍यादातर बार ऐसा फैसला एडल्‍ट कंटेंट प्रसारित करने पर लिया गया। हालांकि पहले किसी घटना के कवरेज को लेकर किसी भारतीय न्‍यूज चैनल पर कार्रवाई नहीं हुई। एनडीटीवी इंडिया को ऑफ एयर करने की सिफारिश न्‍यूज चैनल के खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई है। साल 2015 में सरकार ने अल जजीरा को भारत का गलत नक्‍शा दिखाने पर पांच दिनों के लिए ऑफ एयर कर दिया था। साल 2007 में जनमत टीवी को 30 दिन के लिए ऑफ एयर करने का ऑर्डर हुआ था। यह आदेश फर्जी स्टिंग ऑपरेशन दिखाने के चलते दिया गया था। इस मामले में चैनल ने अपनी गलती मानी थी और स्टिंग फर्जी साबित हुआ था।

Video: सरकार ने NDTV इंडिया को एक दिन के लिए प्रसारण रोकने का दिया आदेश

सरकार ने NDTV इंडिया को एक दिन के लिए प्रसारण रोकने का दिया आदेश; पठानकोट हमले का संवेदनशील विवरण देने का आरोप

ndtvvvv पहले कब-कब हुई कार्रवाई: अब तक एएक्‍सएन और फैशन टीवी सबसे ज्‍यादा बार ऑफ एयर किए गए। यूपीए सरकार के समय भी नियम तोड़ने पर चैनल्‍स पर दंडात्‍मक कार्रवाई की गई थी। साल 2005 से 2013 के बीच यूपीए शासन के समय 20 चैनलों को ऑफ एयर किया गया था। इनमें से ज्‍यादातर पर एंडल्‍ट कंटेंट और न्‍यूडिटी दिखाने के चलते कार्रवाई हुई। साल 2007 से 2010 के बीच तीन बार एफटीवी को ऑफ एयर किया गया। पहली बार ‘मिडनाइट हॉट’ कार्यक्रम प्रसारित करने पर दो महीने के लिए उसका प्रसारण रोक दिया गया। इसके बाद टॉपलैस महिलाएं दिखाए जाने पर साल 2010 में उस पर नौ दिन का प्रतिबंध लगाया गया। साल 2013 में अश्‍लील कंटेंट दिखाने पर एफटीवी को 10 दिन का बैन झेलना पड़ा। इसके अलावा एएक्‍सएन और सिने वर्ल्‍ड चैनल भी ऑफ एयर किए गए थे। सूचना प्रसारण मंत्रालय के अनुसार टीवी चैनलों पर केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्‍स 1994 के तहत कार्रवाई की जाती है। ये नियम नग्‍नता और एडल्‍ट कंटेंट दिखाने पर रोक लगाते हैं।

हमारी मीडिया अनेकों ऐसे उदाहण प्रस्तुत कर चुकी है, जिससे स्पष्ट आभास होता है कि शायद मीडिया को किसी लोकसभा या पंचायत का चुनाव लड़ना हो। जब किसी हिन्दू द्वारा कोई हरकत होती है बड़ी-बड़ी छाती पीटकर समाचार प्रसारित किया जाता है। परन्तु जब वही काम किसी मुस्लिम वर्ग द्वारा किया जाता है, समुदाय या लोगो  शब्द प्रयोग करते ही स्पष्ट हो जाता है “यह काण्ड मुस्लिम समुदाय का है और अबके बाद चर्चा यानि समाचारों में नहीं आएगा।”

लेकिन सोशल मीडिया पर आपको सब कुछ पढ़ने को मिल जायेगा। यही कारण है सोशल मीडिया पर गम्भीर आरोप भी लगाए जाने के बावजूद भरपूर राजनैतिक  प्रयोग किया जाता है।

प्रस्तुत समाचार अवलोकन करने उपरांत क्या इन समाचारों को नकारने का साहस है किसी में? इतना ही कहना है ” जिस तरह हर पीली धातु सोना नहीं होती, उसी प्रकार सोशल मीडिया पर हर समाचार अफवाह नहीं होती।” फिर किसी को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि “बिना चिंगारी के चमक नहीं होती या बिना अंगीठी के धुआँ नहीं होता।” किसी एक बिंदु को तो मानना ही पड़ेगा। जो अफवाह होती है वह अलग ही पकड़ में आती है, किन्तु जो वास्तविकता होती है, उसे कोई जुडला नहीं सकता।

बीजेपी सांसद विजय गोयल ने मई 9 को  राज्य सभा में PAID NEWS का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कार्यपालिका, न्यायपालिका और पुलिस के बाद मीडिया को देश का चौथा स्तंभ कहा जाता है लेकिन आजकल मीडिया बेलगाम होता जा रहा है और PAID NEWS देकर देश के लोगों को भ्रमित करने का काम करता रहता है। विजय गोयल ने कहा कि देश के सभी नामी गिरामी अख़बारों में पेड न्यूज आता है। कोई इसे एडिटोरियल कहता है कोई फ्री स्पीच कहता है।

उन्होंने एक ताजा घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि वे एक दिन अखबार पढ़ रहे थे तो एडिटोरियल में एक लेख छपा था जिसमें कहा गया था कि दिल्ली की ओड-ईवन योजना असफल हो चुकी है क्योंकि इससे प्रदूषण कम नहीं हुआ, उन्होंने दूसरे दिन वही अखबार पढ़ा तो उसमे लिखा था कि दिल्ली की ओड-ईवन योजना सफल हो गयी।

विजय गोयल ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि जो अखबार एक दिन लिखता है कि ‘ओड ईवन योजना असफल हो गयी’ वही अखबार दूसरे दिन छाप दे कि ‘ओड ईवन योजना सफल हो गयी’। विजय गोयल ने कहा कि मैंने प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को इस विषय में पत्र भी लिखा लेकिन उन्होने  मेरे प्रश्न का कोई जवाब नहीं दिया।

सेवानिर्वित होने से कुछ वर्ष पूर्व कृष्णा नगर सुबह अपने बड़े भाईसाहब के पास गया था। आये दिन सड़क बनने के कारण उनके सामने पडोसी का मकान नीचा हो गया था। नाली भरने एवं बारिशों में पानी अंदर भर जाता था। उस समस्या से निजात पाने के लिए नगर निगम भवन विभाग एवं पुलिस आदि को काम शुरू करने पूर्व ही चढ़ावा दिया जा चूका था।ये नेग बहुत जरुरी है।  बैठा चाय पी रहा था कि बाहर से शोर सुनाई देने पर बाहर आकर देखा किसी गली-छाप साप्ताहिक का रिपोर्टर उनको धमका रहा था। प्रैस का होने की वजह से गली शांत थी, जब उस सज्जन से परिचय-पत्र लेकर हवा में उछाल अपना परिचय-पत्र हवा में उछालने को कहा। मेरी शक्ल देख, अपना कार्ड उठाकर चला गया। इसी तरह की मिसाल मेरी अपनी ही गली में हुई थी। कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसे ब्लैकमेलर पत्रकार हैं।

फिर सेवानिर्वित उपरांत एक हिंदी पाक्षिक में कार्यकारी संपादक रहा। अपने लेखों से पाक्षिक को एक नया आयाम भी दिया। एक दिन अपने पुराने कार्यालय से वापस लौटते कमला मार्केट थाने पर प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक् मीडिया का जमावड़ा देख जब कारण पूछा ,पहले तो बोल दिया “कुछ नहीं जाओ अपना काम करो”,अपना परिचय देने पर कारण मालूम होने पर उनसे पूछा “भाई ये बताओ बलात्कार हुआ जोधपुर में, रिपोर्ट दिल्ली में ,लड़की और उसके माँ-बाप ने अभी आना है, मीडिया पहले से मौजूद। यार दाल में कुछ काला है। बापू आसाराम को फंसाया जा रहा है।”

tdeovfigewli2ekhवास्तव में अपने जून 9,2012 के एक समागम में आसाराम ने कहा था “सोनिया मैडम आप हिन्दुओं को ईसाई बनवाओ, मैं वापस उनको हिन्दू बनाऊंगा।” उसी दिन से इस षड्यंत्र की भूमिका बननी प्रारम्भ हो गयी थी। इस षड्यंत्र को अपने नाम से उस पाक्षिक में आमुक कथा एवं अन्य लेखों में भी लिखा। कोई चैनल ऐसा नहीं था, जिसने आसाराम को कलंकित करने का कोई प्रयास नहीं छोड़ा था। सभी आसाराम को कलंकित कर अपनी टीआरपी बढ़ाने में व्यस्त थे। क्या ये paid news नहीं थी ? माना आसाराम ऐय्याश है। उसे दण्ड दिया जाना चाहिए , लेकिन उस घटना से पूर्व मीडिया कहाँ थी ?मीडिया से पूछा जाये कि किसके कहने पर पीड़ित लड़की और उसके माँ-बाप के पहुँचने से पूर्व कमला मार्केट थाने पर जमावड़ा हुआ था?

इतना ही नहीं Paid  Media से यह भी पूछा जाये कि जब दीपावली की रात को पूजनीय जितेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया था, वो महिलाएँ कौन थी और कहाँ से आईं थी जो टीवी पर अपने शीलहरण की दास्तान सुना रही थी ? इस घटना को भी उस पाक्षिक में प्रकाशित किया था। पिछली सरकार के रहते किसी भी चैनल ने साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद एवं कर्नल पुरोहित के साथ हो रही  अमानवीय घटनाओं के समाचार क्यों नहीं उजागर किये ? ऐसी एक दो नहीं हज़ारों घटनाएँ हैं, जिन्हे लिखने में जगह का आभाव हो जाएगा, परन्तु घटनाएँ नहीं।


अवलोकन करें:–
Media को Paid किसने बनाया ?

अंध भक्ति न करने वाले न्यूज़ चैनल एनडीटीवी को बैन करने के मामले में सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गयी है और सोशल मीडिया पर भारी तादाद में यूजर्स  एनडीटीवी के एंकर रवीश कुमार के समर्थन में अपनी आवाज़ बुलन्द कर रहे हैं ।

वहीँ न्यूज़ चैनल को बैन करने की खबर से नाराज़ सोशल मीडिया यूजर्स मोदी सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं । ट्विटर पर एनडीटीवी के समर्थन में #IStandWithNDTV के हैश टेग के साथ एक मुहिम शुरू हो चुकी है ।

इस बीच कांग्रेस नेता एवम सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आगाह किया कि यदि एनडीटीवी को बैन किया गया तो वे पीएम आवास के सामने धरने पर बैठ जायेंगे । उन्होंने कहा कि एनडीटीवी को सरकार के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती देनी चाहिए ।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने एनडीटीवी को प्रतिबंधित करने का फैसला नही बदला तो वे बिना शोर किये शांतपूर्ण तरीके से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के घर के बाहर धरना करेंगे ।

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