कांग्रेस आखिर कब तक साम्प्रदायिकता का ज़हर फैलाती रहेगी?

आर.बी.एल.निगम, दिल्ली ब्यूरो चीफ

RBL Nigamकांग्रेस अपने आपको वास्तव में महात्मा गाँधी का अंधभक्त सिद्ध करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही। जब शान्तिप्रिय अब्दुल रशीद ने स्वामी श्रद्धानंद का क़त्ल किया था, तब गाँधी ने कहा था “रशीद मेरा भाई है, वह ऐसा नहीं कर सकता। ….” उसी नीति पर कांग्रेस आज तक चल रही है। आखिर कांग्रेस कब वास्तविक धर्म-निरपेक्षता को समझेगी? विश्व मान रहा है कि आतंकवादी पाकिस्तान में पल रहे हैं, और पाकिस्तान आतंकवादियों को जेहाद के माध्यम से जन्नत का रास्ता दिखा रहा हैं।  उसके बावजूद दिग्विजय जैसे कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि आतंकवाद को मजहब से नहीं जोड़कर देखना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफ़ज़ल ने अप्रत्यक्ष रूप से यह तो स्वीकार किया कि आतंकवाद का मजहब होता है।  परन्तु दिग्विजय जो अपने बड़बोलों के कारण हमेशा चर्चा में रहते हैं, एक बार फिर आतंकवाद को किसी मजहब से न जोड़े जाने की बात बोलकर क्या सिद्ध करना चाहते हैं।

कांग्रेस की ही इन दोगली नीतियों के कारण  दूर तक अपनी जड़ें फैला चुकी  साम्प्रदायिकता की जड़ों में मढ़ा डालना शुरू किया जा चूका है, फिर भी साम्प्रदायिकता का ज़हर फ़ैलाने का कोई अवसर नहीं छोड़ा जा रहा।

दिग्विजय सिंह जो लादेन को जी बोलते हैं , आतंकवादियों को साहिब बोलते हैं उन्होंने फिर अपना असली रूप दिखा दिया है । एक तरफ़ जहाँ जहाँ देश उरी सेक्टर अटैक को लेकर बेहद सदमे में है वहीं दिग्विजय सिंह वोट बैंक की रोटियाँ सेंकने में व्यस्त हो गये हैं ।

पढ़िए उनका ट्वीट

gy5dtsvpउनके अनुसार जो लोग सैनिकों को मारते हैं , पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाते हैं , उनका कोई मजहब नहीं होता और उनके ऊपर कोई भी करवाई उनका मज हब देखकर नहीं करनी चाहिए । अब दिग्विजय सिंह क्या ये बताएँगे कि पाकिस्तानी कायर आतंकवादियों के ऊपर करवाई में मज हब बीच में कहाँ से आ गया ?

क्यूँ दिग्विजय सिंह की हर बात मजहब को बीच में लाने से शुरू होती है और वहीं पर ख़त्म हो जाती है । सारी दुनिया जानती है कि दुनिया के 99%आतंकी किस मजहब से आते हैं । लेकिन दिग्विजय सिंह को तो वोट बैंक की रोटियाँ सेंकनी हैं । ये वो ही दिग्विजय हैं जिन्होंने मुंबई हमले में पाकिस्तान और उसके आतंकियों का बचाव करते हुई RSS को दोषी ठहरा दिया था । ये वो ही दिग्विजय हैं जो हिन्दुओं को आतंकी कहते हैं , ये वो ही दिग्विजय हैं जिनको रोहित वेमुला की जाती तो पता चल जाती है पर आतंकियों का धर्म पता नहि चलता ।

ये वो ही लोग हैं जो बटाला हाउस पर  आतंकियों के लिए रोते हैं , ये वो ही लोग हैं जो इशरत जहाँ के पक्ष में खुलकर आ जाते हैं , ये वो ही लोग हैं जो जिनको गौ माता की हत्या रोकने के लिए लगे हुए हिन्दुओं का धर्म एक मिनट में पता चल जाता है ।

साफ़ साफ़ बात ये है ये वोट बैंक की रोटियाँ सेंकने वाले कायर और ख़ुदगर्ज़ नेता और ऐसे लोगों से जुड़ी पार्टियाँ पाकिस्तान और इस्लामिक आतंकवादियों से भी ज़्यादा ख़तरनाक हैं , ये लोग माँ भारती के सबसे बड़े दुश्मन हैं । अभी तो मोदी सरकार ने पाकिस्तान पर कोई करवाई नहीं की है हम सोचते हैं जब करवाई होगी तो ये लोग अपने कौन कौन से रूप दिखाएँगे ।

अब जब आतंकवाद का मजहब जगजाहिर हो चूका है, फिर भी इस तरह की बातें करना, उन सभी देशप्रेमियों  के लिए शर्म की बात है जो कांग्रेस का समर्थन  एवं कांग्रेस में शामिल रहते हैं।  दो नाव में बैठकर नदी पार नही की जा सकती।