भला मैं क्यों दूं इस्तीफा

devbhoomi-samachar-gajendra-chauhanनई दिल्ली। भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान ;एफटीआईआईद्ध के अध्यक्ष पद पर फिल्म कलाकार और भाजपा नेता गजेंन्द्र चैहान की नियुक्ति का विवाद लंबे समय से चल रहा है। संस्थान के छात्र चैहान को हटाने की मांग पर अड़े हैं, जबकि चैहान इस मुद्दे का हल  निकालने के लिए आंदोलनरत छात्रों और सरकार के बीच मध्यस्थता करने को तैयार हैं। इसी विषय पर आधारित है यह साक्षात्कार -सम्पादक

बात बहुत बढ़ गई है। सरकार की फजीहत हो रही है। क्या आपको अब इस्तीफा नहीं देना चाहिए?
मुझे क्यों इस्तीफा देना चाहिए? मुझे कोई राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी गई है। मुझे केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय की तरफ से यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। कल किसी नागरिक को कहा जाए कि वह सीमा पर लड़े, तो क्या वह लड़ने से मना कर देगा? मैं अपनी जिम्मेदारी समझता हूं और उसे निभाने के लिए हर समय तैयार हूं जैसे ही यह मामला सुलझ जाएगा, हम एफटीआईआई की बैठक करेंगे। गवर्निंग काउंसिल का गठन कर हम आगे काम करेंगे।

छात्र आपको संस्थान के अध्यक्ष के तौर पर देखना नहीं चाहते। आपको लगता नहीं कि आप सरकार की शर्मिदगी की वजह बन रहे हैं?
मैं किसी की शर्मिदगी की वजह नहीं बन रहा हूं। हर किसी को विरोध करने का मौलिक अधिकार है। छात्र अपने अधिकार के तहत विरोध कर रहें हैं। मगर हमें समझना होगा कि बिना उचित कारण के विरोध करने का कोई औचित्य नहीं।

आप पर आरोप है कि आप एफटीआईआई जैसे संस्थान के लिए कम अनुभवी है और भाजपा से जुड़े होने के चलते आपको यह पद बतौर इनाम मिला है।
मैं मेरठ से स्नातक हूं। मैने सीटी स्कैन का कोर्स किया।  दो-ढाई साल मैंने दिल्ली के एम्स में भी काम किया। उसके बाद में मुंबई आयां एफटीआईआई में  एक्टिंग कोर्स खत्म हो गया था। इसलिए एफटीआईआई के प्रमुख रहे रोशन तनेजा के एक्सट्रेस स्टूडियो से मैने एक्टिंग कोर्स किया। एफटीआईआई के बाद रोशन तनेजा का स्टूडियो अव्वल माना जाता था। अनिल कपूर, गुलशन ग्रोवर, गोविंदा, मजहर खान जैसे कई जाने-माने कलाकार वहां से निकले हैं। मैंने जो भी किया, अपने बल पर किया। मैं सेल्फ मेड आदमी हूं। मैंने छोटी-बड़ी फिल्मों में काम किया है। कई धारावाहिक किए हैं। 24 साल का व्यावहारिक अनुभव मेरे पास है। इसलिए यह नहीं कह सकते कि सरकार ने मुझे रातों रात अध्यक्ष बनाने का फैसला ले लिया। पूरी छानबीन करके और मेरा अनुभव देखकर ही मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

खबर यह भी आई थी कि वित्त तथा सूचना और प्रसारण मंत्री अरूण जेटली ने आपकी नियुक्ति के समय कहा था कि आप उनकी पहली पंसद नहीं हैं।
मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं। इस मामले में आप उनसे ही जानकारी लें, तो अच्छा होगा।

कई फिल्म बड़ी फिल्मी हस्तियों ने आपकी नियुक्ति का विरोध किया है। वे  छात्रों की मांग का समर्थन कर रहे हैं। इसे क्या कहेंगे आप?
मैं अर्टिस्ट एसोसिएशन का सदस्य हूं। मैं उसका अध्यक्ष भी रहा हूं। उसके आठ हजार सदस्य हैं। अगर इतने लोगों में चंद लोग मेरे खिलाफ कुछ बोलते हैं, तो उसमें हर्ज क्या है? हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है।  मैं किसी पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। मुझे किसी खास व्यक्ति ने नियुक्त नहीं किया है, बल्कि यह जिम्मेदारी मुझे केंद्र सरकार ने सौंपी है। इसलिए मैं सरकार मे प्रति जिम्मेदार हूं।

अगर केेंद्र सरकार आपको हटने को कहती है, तो आप क्या फैसला लेंगे? हालांकि संस्थान में आपकी भूमिका कम किए जाने की खबर है!
यह काल्पनिक सवाल है। अगर सरकार ऐसा कुछ कहेगी, तो मैं उसी समय उसका पालन करूंगा। जहां तक मेरी भूमिका का सवाल हैं, तो मुझे भी यह बात पता लगी है मगर कोई अधिकारकि सूचना अब तक मुझे नहीं मिली है, इसलिए इस पर कुछ कह नहीं सकता।

भले इस विवाद का हल सरकार को करना है, पर आन अपनी तरफ से क्या पहल करेंगे?
मैं छात्रों से कई बार गुजारशि कर चुका हूं कि दुनिया में कोई भी विवाद संवाद की मेज पर हल होता है। छात्र मेरे साथ मेरे साथ बैठें और बात करें। मे मंत्रियों के साथ बैठें। मगर इसके लिए जरूरी है कि छात्र बातचीत के लिए राजी हों।

क्या छात्रों के आंदोलन के पीछे कोई सियासी ताकत है? क्या उसके आगे आप झुकेंगे?
मेरी जानकारी में ऐसा नहीं है। मैं बस यही समझता हूं कि इस विवाद का हल छात्रों के साथ बातचीत करे निकलेगा। रही बात झुकने की, तो कौन झुकेगा, और कौन नहीं, यह आने वाला समय बताएगा।