मासूम बहुओं की जान ले रहे हैं दहेज लोभी

बाराचट्टी से अशोक शर्मा

आज कल आऐ दिन विवाह होकर बहुएं जैसे ही मैके से अपने पति के साथ ससुराल आती है तो उसे चंद दिनो के बाद ससुराल के परिवार जैसे कि सास-ससुर एव ननद इस नई नवली दुल्हन के साथ प्रताड़ित और दहेज के बाते करते हुए ताना मार कर बेचारी के खाना पीना हराम कर दी जाती है।

बेचारी विवश होकर अपने मैके को जाति है। मैके मे पहुंचे ही परिवार से अपने ससुराल की बात करती है। अपने परिवार सास ससुर के बात जैसे ही वह कहती है, वैसे ही अपने बेटी को कुछ समान देकर मैके परिवार के साथ ससुराल आती है।

कुछ समय के बाद फिर से दहेज लोभीयो ने अपनी बहू के साथ कहानी दोहराते हुए डिमांड टीवी फ्रिज करते है। बहू विवश हो कर मैके नहीं जाती है। ससुराल मे ही शोशन और पङतारि सह कर जिवन जिने की संकल्प लेती है। कहती है कि आप लोग मुझे जो कहेंगे मै मंजूर करूगी लकिन आप हमे ससुराल मे ही चैन से रहने दे, लेकिन पिङीता की बात को स्वीकार नही की जाती है।

दिन प्रतिदिन बेचारी बहू पर शिकंजा कसने के नाम नही थमते। अंत मे वह परिवार सास ससुर को कहती है कि बाबूल की घर से बेटी की डोली निकल कर ससुराल आती है और ससुराल से अर्थी बाहर निकलती है। इन चंद समय के बाद फिर वह अपने ससुराल वाले के साथ मार दी जाती है।