काव्य पाठ का जादू बिखेर रही है नैनीताल की बेटी

  • बहुत कम समय में देशवासियों के दिलों में बनायी जगह।
  • उत्तराखण्ड की खूबसूरती से अपनेे अंदाज में कराती हैं श्रोताओं को रूबरू।
  • काव्य जगत के बड़े-बड़े दिग्गजों के साथ कर चुकि हैं मंच साझा।
  • कुमाऊँनी, गढ़वाली व भोजपुरी एल्बम में भी कर चुकि हैं अभिनय।

पवन दूबे

हमारे समाज के भीतर बहुत बड़ा तबका शुरू से नारी समाज के विरूद्ध रहा है। हालांकि, समाज के भीतर कुछ लोगों को इससे तनिक भी आपत्ति नहीं है कि नारी समाज स्वतन्त्र रूप से अपनी जनभागीदारी सुनिश्चित करे। अधिकांश क्षेत्रों में नारी का दुश्मन हमारा समाज और उसमें आने वाले लोगों की छोटी मानसिकता ही है। अपनी इस छोटी मानसिकता के चलते कुछ लोंगों द्वारा नारी समाज की आजादी, उनके सपनों को पूरा करने की इच्छा सब उनसे छीन ली जाती है। ऐसे में कुछ नारी, अन्य की मानसिकता को नजरअंदाज करते हुए अपने सपनों को पूरा करने के लिए चाहरदिवारी से बाहर निकल समाज के साथ कंधे से कंधा मिला चलने की हिम्मत कर जाती हैं और वह समाज के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन जाती हैं। नारी को त्याग, समर्पण, संघर्ष और बलिदान की मूरत ऐसे ही नहीं कहा जाता है, एक स्त्री के बालपन से उसकी मृत्यु तक यह सभी जीवन में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देते हैं जिसको चाह कर भी कोई झुठला नहीं सकता।

आइए हम आपको बताते हैं ऐसी ही एक तेजस्वी युवती ’’गौरी मिश्रा‘‘ के बारे में जिसने अपने समाज की अढ़चनों के बावजुद संघर्ष को जीवन से मिटने नहीं दिया और आज देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व देश के बड़े-बड़े मंचों से करती हैं। गौरी ने अल्पायु में ही लेखनी से हाथ मिला लिया था, किसी भी बात को एक अलग गीत के अंदाज में कहते वक्त वह उसको सुरमयी कर देती थीं और जब कोई बात न कह पाती तो उसको अपने सुरीले अंदाज में किसी डायरी या कॉपी में लिख देती थी। धीरे-धीरे यह उनके जीवन का हिस्सा बनता चला गया और जब गौरी कक्षा छः की छात्रा थीं उस समय उनकी उम्र लगभग 12 वर्ष थी तब उन्होंने भजन व गीत लिखने की शुरूआत की, लेकिन पढ़ाई के चलते उनकी यह प्रतिभा किसी के सामने न आ सकी।

जब गौरी कक्षा नौं में थीं तब उनकी लेखन की यह प्रतिभा समाचार पत्रों के माध्यम से समाज के सामने आई जिसको लोंगों ने खूब सराहा भी। कभी उनकी लेख को आर्टिकल के रूप में प्रकाशित किया जाता, तो कभी उनकी कविता को ’’बच्चों का कोना‘ं भाग में स्थान दिया जाता। जब गौरी कक्षा ग्यारह में पहुंची तो उनकी पढ़ाई का स्तर बढ़ने के कारण अपनी सारी ऐक्टिविटीज को एक तरफ कर पढ़ाई की ओर ध्यान केन्द्रीत करना पढ़ा, और इसी प्रकार कक्षा बारह में भी वह इनसे दूर रहीं। कक्षा बारह के बाद गौरी ने हल्द्वानी के एम.बी.पी.जी. महाविद्यालय में बी.एस.सी प्रथम वर्ष में दाखिला लिया। इस दौरान अपनी पढ़ाई को जारी रखने में उनको आर्थिक संकट नजर आनेे लगा। क्योंकि गौरी एक सामान्य परिवार की बेटी हैं। उनके पिता ओम प्रकाश मिश्रा बी.एस.एन.एल. विभाग मंे कार्यरत हैं, और माँ गृहिणी हैं। गौरी छः भाई-बहनों में सबसे छोटी बहन हैं और भाई उनसे भी छोटा है।

सामान्य परिवार के लिए आज के दौर में मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना बहुत मुश्किल होता है। चंूकि बात उच्च शिक्षा की थी तो गौरी ने उसको किसी भी हाल में पूरा करने का संकल्प ले लिया और संकल्प जब सच्चे मन से लिया जाता है तो सिद्ध जरूर होता है। गौरी को भी जल्द ही कुमाऊँनी व गढ़वाली एल्बमों में अभिनय करने का अवसर मिल गया। प्रतिभा की धनी गौरी ने अपनी मेहनत और सफल अभिनय के जरिये धीरे-धीरे अपनी बी.एस.सी. की पढ़ाई पूरी कर ली। जिसके बाद गौरी ने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए सामान्य लोंगों की भांति नौकरी की तालाश शुरू कर दी। तभी उनको कहीं से ऑल इण्डिया रेडियो, रामपुर (आकाशवाणी) के एक विज्ञापन के बारे में पता चला जिसके बाद उन्होंने वहां का फार्म भर कर उसके साथ अपनी रचनाएं आदि रामपुर आकाशवाणी केन्द्र को भेजीं। कुछ दिनों बाद उनको सूचना मिली की उनकी रचनाएं चयनित हो गयी हैं। वह पल गौरी के जीवन का पहला पल था जहां से उनके जीवन को एक नया मोड़ मिला। इसके बाद उन्होंने वहां एक भजन गायिका के रूप मंे अपनी रिकार्डिंग शुरू कर दी और उनके द्वारा लिखे व गाये गए भजनों का प्रसारण आकाशवाणी के माध्यम से होने लगा।

एक दिन में चार-पाँच भजनों की रिकार्डिंग होने लगी थी, उनमें से कई भजन जो काफी प्रचलित हुए थे ’’मुझे काम है ईश्वर से जगत रूठे तो रूठन दे‘‘ एक यह भी है। जिसके बाद से समाचार पत्रों के माध्यम से गौरी को भजन गायिका के नाम से क्षेत्र में प्रसिद्धि मिली। समाचार पत्रों को पढ़कर कुछ समय बाद वर्ष 2014 में गौरी को नैनीताल – हल्द्वानी के कवियों द्वारा काव्यगोष्ठियों में व अन्य कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाने लगा। गौरी शुरू से ही अपने सभी कार्यक्रमों को सोशल मीडिया पर साझा करती थीं, जहां उनको लोगों ने काफी पसंद किया। उसके बाद हल्द्वानी व नैनीताल की साहित्य लहरी एवं साहित्य सृजन व अन्य सामाजिक संस्थाओं द्वारा काव्यपाठ करने के लिए गौरी को बुलाया जाने लगा। गौरी का मानना है कि सोशल मीडिया का उनकी सफलता के पीछे बहुत बड़ा रोल है। गौरी से जब पूछा गया की सोशल मीडिया से ज्यादातर अभिभावक बच्चों को दूर रहने के लिए कहते हैं इस पर आपका क्या कहना है तो उन्होंने कहा कि हर चीज के दो पहलु होते हैं एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक यदि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सकारात्मक किया जाए तो उससे किसी प्रकार की समस्या या हानि नहीं होती है। उन्होंने बताया कि कुछ तत्वों द्वारा सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर उसको बदनाम किया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है। कहा कि ऐसे अभिभावक जो बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रहने के लिये कहते हैं उनको चाहिए कि बच्चों को नकारात्मक न होने दें और सकारात्मकता के साथ सोशल मीडिया से जुड़े रहने दें क्योंकि वहां बच्चों का बौद्धिक विकास तेजी से होता है बस नकारात्मकता से उनको बचाया जाए। गौरी ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय सोशल मीडिया को दिया है और एक संदेश भी दिया कि यदि आपमें प्रतिभा है तो दुनिया के सामने लाने के लिए सोशल मीडिया से बेहतर विकल्प कोई नहीं है।

यदि युवापीढ़ी सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करने लगे तो अपना देश भी बहुत तेजी से आगे बड़ेगा साथ ही, आज के समय में सोशल मीडिया के माध्यम से रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हैं जिससे बेरोजगारी की समस्या को दूर किया जा सकता है। पुनः वार्ता के क्रम में लौटते हुए गौरी ने बताया कि वर्ष 2015 में पहली बार उनको सोशल मीडिया के माध्यम से ही कविसम्मेलन के बड़े मंच का ऑफर आया। काशीपुर के प्रसिद्ध गजलकार, गीतकार डॉ0 मनोज आर्य ने काव्यपाठ के लिए पहला बड़ा मंच दिया। इसके बाद काव्यपाठ का सिलसिला बरकरार है। गौरी ने देश-विदेश में प्रतिस्ठित सुरेश शर्मा व सुनील जोगी (पद्म श्री), डॉ0 हरिओम पंवार, राहत इन्दौरी, डॉ0 कुमार विश्वास, शैलेस लोहड़ा (तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम), सुनील पॉल व अहसान कुरैशी (लाफ्टर चैलेन्ज फेम) जैसे काव्यजगत के बड़े-बड़े दिग्गजों के साथ मंच साझा करते हुए अब तक कई सारे कवि सम्मेलन कर चुकि हैं।

गौरी ने बहुत कम समय में काव्यजगत में अपना अहम स्थान बनाया है और उनकी भाषाशैली को हमेशा सराहा जाता है क्योंकि उनकी काव्य प्रस्तुति में भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई पड़ती है। गौरी श्रृंगार रस की कवियित्री हैं लकिन देशभक्ति का वीर रस भी कभी कभी उनकी रचनाओं में देखने को मिल जाता है। गौरी की बढ़ती हुई लोकप्रियता को देखते हुए उनको प्रिन्ट मीडिया के विभिन्न समाचार पत्रों के द्वारा आयोजनों में संचालन करने हेतु बतौर संचालिका आमंत्रित किया जाने लगा। गौरी को देश के श्रोताओं ने और विभिन्न मंचों ने स्वीकार किया और उनकी रचनाओं और उनके संघर्ष के लिए उनको एक ही वर्ष 2014 में चार राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित भी किया गया, जिसमें राष्ट्रीय नारि शक्ति सम्मान, डायमण्ड ऑफ इण्डिया सम्मान (प्रतिभा रक्षा सम्मान समिति, हरियाणा द्वारा), आर्च ऑफ एक्सीलेन्स अवार्ड, रत्न ‘ए’ हिन्दुस्तान सम्मान शामिल हैं। वर्ष 2015 में शान ‘ए’ हिन्दुस्तान सम्मान और वर्ष 2016 में शाईनिंग डायमण्ड अवार्ड, एण्टी करप्शन फाउण्डेशन द्वारा देकर सम्मानित किया गया। गौरी को आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मिशाल के रूप में देखा जाना गलत नहीं होगा।