कम किया जा सकता है पलायन को

चमोली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धनसिंह रावत ने सीमांत क्षेत्र गमशाली एवं कैलाशपुर में शिल्पियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा शिल्पियों के उन्नयन हेतु वर्तमान में विभिन्न योजनाओं को क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिसका लाभ लेकर शिल्पी महिलाऐं घर पर से ही अपने आजीविका में वृद्धि कर सकते है और सीमांत क्षेत्र से हो रहे पलायन को भी कम किया जा सकता है। उन्होंने उद्योग विभाग द्वारा इस सीमांत एवं दूरस्थ क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन की सराहना की।

सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एवं जिला उद्योग केन्द्र चमोली द्वारा आयोजित सीमांत क्षेत्र तकनीकि उन्नयन एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रम हथकरघा एवं हस्तशिल्प पर आधारित 3 माह के कारपेट व शाॅल बुनाई एवं डिजाईन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ उच्च शिक्षा एवं सहाकारिता मंत्री डा. धन सिंह रावत एवं बद्रीनाथ विधायक महेन्द्र भट्ट द्वारा गमशाली एवं कैलाशपुर में 15 अगस्त को किया गया।

इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक श्री भट्ट ने अपने संबोधन में शिल्पियों की तारीफ करते हुए कहा कि इस सीमांत क्षेत्र में माताओं एवं बहिनों ने जो कालीन एवं शाॅल शिल्प कार्य कर रही है वह अद्वितीय है और शिल्प की लुप्त हो रही परपरा को बनाये हुए है। कहा कि सरकार द्वारा शिल्प विकास के लिए निरन्तर प्रयास किये जा रहे है।

कार्यक्रम में उद्योग विभाग के महाप्रबन्धक डा. एमएस सजवाण ने स्वागत संबोधन में बीएडीपी हस्तशिल्प विकास वर्कशाॅप के उदेश्य व योजना के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर ग्राम प्रधान गमशाली रूखमणी देवी, प्रधान कैलाश पुर गौर सिंह डुगरियाल द्वारा उच्च शिक्षा राज्यमंत्री एवं विधायक का धन्यवाद किया गया। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रबन्धक उद्योग बीएस कुंवर द्वारा किया गया।