“नेताजी की यात्राएं”, कहते हैं मुझको हवा हवाई

ललित शौर्य

हवा हवाई शब्द सुनते ही कानों में वो गाना कुलबुलाने लगता है, जिसको श्री देवी पर फिल्माया गया था। कहते हैं मुझको हवा हवाई… उनका चुलबुला अंदाज मन को मोह लेता था। पर आजकल हवा हवाई शब्द सुनो तो दिमाग में एक चित्र और उभरने लगता है। वो चित्र है देश के नेताओं का। क्योकिं जो नेताजी चुनाव से पहले जमीनी होते हैं वो चुनाव जीतते ही हवाई हो जाते हैं। उनकी सारी चींजें हवाई लगने लगती हैं। अब वो भूमि पर पग धरने से भी कतराते हैं। उन्हें आसमान से महोब्बत हो गई है। हवा से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। हवा के संग-संग, घटा के साथ – साथ वाला गीत उनके मोबाइल में बजते रहता है। नेताजी हवा के अलावा किसी से बात करना पसंद नहीं करते। सरकार आने के बाद उनके सारे कार्य हवा हवाई होते हैं। सड़कें, पुल, रोजगार, बिजली-पानी के वादे सब हवा में फुर्र। हद तो तब हो जाती है जब बाढ़, भूस्खलन हो जाता है तब भी नेताजी की यात्राएं हवा हवाई होती हैं।

वो ऊपर उड़नखटोले से नुक़सान का जायजा लेते हैं। कुछ देर हवा में मंडराते हैं, हवा में ही फोटो खिंचवाते हैं फिर दूसरे दिन अखबारों में तैरते हुए नजर आते हैं। इस तरीके से नेताजी दिन भर में कई हवाई दौरों को अंजाम देते हैं। चुनाव से पहले नेताजी गाँव-गाँव डोलते हैं, दुर्गम अति दुर्गम क्षेत्रों को भी पाँवो से नापते हैं। पर मंत्री बनते ही वो क्षेत्र नेताजी के लिए नॉट रिचेबल हो जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में जाकर करना भी क्या जहाँ सड़कें ना हों, बिजली- पानी ना हो। और हां नेताजी के उड़नखटोले को उतरने के लिए मैदान तक ना हो। हवा हवाई अर्थात माननीय मंत्री जी का केवल उन क्षेत्रों में ही टारगेट रहता है जहाँ से आसानी से उड़ा जाए, जहाँ आसानी से उतरा जाए। नेताजी को सारा काम हवा में पसन्द है। उन्हें अब जमीनी काम रास नहीं आता। योजनाएं बनें तो हवा में, क्रियान्वन हो तो हवा में, रिपोर्ट बनाओ तो हवा में , माल डकारों तो हवा में। मतलब की किसी के कान में जूँ तक ना रेंगने पाये।

सारा काम एक दम साफ़-सुथरा हवा में होना चाहिए। वैसे भी अपने देश में सारे काम हवा में होते आये हैं। संसद और विधानसभाओं को हवा ही पसन्द है। इसलिए मुद्दे हवा में उछाले जाते हैं, बहसें हवा में होती है, विपक्ष के तेवर हवाई होते हैं , सरकार की अदाएं हवाई होती हैं, गरीब की बातें हवाई होती हैं मतलब की टोटली हवा हवाई। जैसे बेबी को बेस पसंद हैं नेताजी को हवा पसन्द है। क्योंकि हवा में उड़ा जा सकता है, हवा में बहका जा सकता है। हवा से ही चुनावी गणित बनाएं और बिगाड़े जा सकते हैं। हवा से ही चुनाव जीता जा सकता है। हवा बनाकर ही मंत्री पद प्राप्त किया जा सकता है। और हां चुनाव जीतने के बाद जनता को सिम्पली हवा ही तो खिलानी है। इसलिए नेतागिरी में हवा हवाई होना बहुत जरुरी है। तगड़ी वैल्यू उसी की है जो हवा हवाई है।