जेल में जंगल राज

भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोपी मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या कर दी गई। मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने कुछ दिन पहले ही आशंका जताई थी कि एसटीएफ उसके पति की हत्या करवा सकती है। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड के संदर्भ में कुख्यात बदमाश सुनील राठी का नाम सामने आ रहा है। सुनील राठी को हाल ही में जान का खतरा बताकर रुड़की जेल से बागपत शिफ्ट किया गया था। यह हत्याकांड सिर्फ जेल की सुरक्षा पर ही प्रश्नचिन्ह नहीं लगा रहा है बल्कि जेलों में किस तरह से अपराधों की भूमिका और योजना बनाई जाती है, उस पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

मुन्ना बजरंगी को यूपी में सपा-बसपा दोनों के समर्थक रहे बाहुबली मुख्तार अंसारी का करीबी होने का आरोप भाजपा लगाती रही है। गौरतलब है कि 29 नवंबर, 2005 को कृष्णानंद राय की हत्या के लिए मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी को दोषी ठहराते हुए सीबीआई जांच की मांग को लेकर राजनाथ सिंह ने वाराणसी में आमरण अनशन शुरू किया तो भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी वाराणसी पहुंच गए और इस कांड के एक महीने के भीतर 24 दिसंबर, 2005 को राजनाथ सिंह को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया।

भले ही मुन्ना बजरंगी की जेल के भीतर हत्या के मामले में यूपी और केंद्र में आसीन भाजपा सरकारों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा कठघरे में खड़ा करना राजनीतिक हथकंडा करार दिया जाए, किंतु किसी भी कैदी की जेल में हत्या हो जाए तो सरकार, शासन और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकते। जेलों में हत्या और गैंगवार कोई पहली घटना नहीं है। अभी दो दिन पहले हरियाणा की सोनीपत जेल में प्लेटों और चम्मचों को घिस-तराशकर हथियार बना दो गुटों ने हिंसा बरपाई थी।

यूपी में ही महानिदेशक, स्वास्थ्य की संदिग्ध फांसी का प्रकरण सुर्खियों में रहा है। कुख्यात बृजेश मावी और राजेश टोटा गैंग के बीच गैंगवार ने उ.प्र. की जेलों में कैदियों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा किया था। 2015 में ही राजस्थान की बीकानेर जेल में गैंगवार के दौरान 3 कैदियों की मौत हो गई थी। देश की सबसे सुरक्षित जिलों में शुमार दिल्ली की तिहाड़ जेल में कई बार गैंगवार की घटनाएं हो चुकी हैं। इन सब घटनाक्रमों के चलते जेल में बढ़ते अपराध और असुरक्षा के मुद्दे पर जेल प्रशासन को जवाबदेही बनाने की जरूरत है।