जेएनयू में पनपती देशद्रोह भावना

आर.बी.एल.निगम, दिल्ली ब्यूरो चीफ़

RBL Nigamहैडली की बयान होने के बाद से वो सब चुप है जो 26/11 के मुम्बई ब्लास्ट को, मुसलमानो और पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए उसे, आरएसएस/ सीआईए की साजिश बता रहे थे। महेश भट्ट, मौलाना मसूद, अज़ीज़ बर्नी, दिग्विजय सिंह उन लोगो में से थे जिन्होंने, जब 26/11, मुम्बई ब्लास्ट की जांच चल रही थी तब भारतीय जनमानस में गलत बयानी करके जांच को दूसरी तरफ मोड़ रहे थे।

यह लोग राष्ट्र द्रोही ही नही, यह लोग पाकिस्तान के एजेंट है। भारत सरकार को इन लोगो को तुरन्त गिरफ्तार करते हुए न सिर्फ इनकी भारतीय नागरिकता छीन लेनी चाहिए बल्कि इनके पाकिस्तान से चलने वाले आतंकी संघटनो से सम्बन्धो को सामने लाना चाहिए। यह सब हिंदुओं के दुश्मन हो या न हो लेकिन भारत के दुश्मन है यह साफ़ है। यह सब राष्ट्र विरोधी शक्तियों से पोषित है और इन लोगो ने भारत में स्वछन्द घूमने का अधिकार खो दिया है। जब राजनीति राष्ट्र को तोड़ने के लिए होने लगे तो उन लोगो को तोड़ देना चाहिए जो इस काम में लगे हुए है, वह चाहे किसी भी धर्म को हो या किसी भी जाति का ही क्यों न हो।

jnu01-11216     एक समय दिल्ली की जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी को देश की सबसे बढ़िया यूनिवर्सिटी में से एक माना जाता था लेकिन आज इसी यूनिवर्सिटी में खुलेआम देश विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं, आतंकी अफजल गुरु को शहीद का दर्जा देने की मांग की जा रही है। कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग की जा रही है और सभी राज्यों को अलग करके देश के टुकड़े टुकड़े करने की बात की जा रही है। यह सब चोरी चुपके नहीं बल्कि टीवी, मीडिया और अखबार वालों के सामने हो रहा है। यह सब देश की राजधानी दिल्ली में होता है और उससे भी आश्चर्यजनक यह है कि देश की सबसे बढ़िया यूनिवर्सिटी में होता है।

ऐसा नहीं है कि यह घटना JNU में पहली बार हुई है, ऐसी घटनाएँ बार बार होती है। टीवी मीडिया और अखबार वाले ब्रेकिंग न्यूज़ तो बनाते हैं लेकिन एक दो हफ्ते में मामला ठंढा पड़ जाता है। ऐसी ही एक घटना आज सामने आई है। वीडियो में कुछ छात्र साफ़ साफ़ नारे लगा रहे हैं कि उन्हें कश्मीर की आजादी चाहिए, वे कह रहे हैं कि तुम कितने अफजल और मकबूल मारोगे। वे कह रहे हैं कि “तुम जितने अफजल और मकबूल मारोगे हर घर से उतने ही अफजल और मकबूल निकलेंगे।”

jnu02-11216वे कह रहे हैं कि “आतंकियों को मौत की सजा बंद करो”, वे कह रहे हैं कि “हम सब आजादी चाहते हैं, हम लड़कर आजादी लेंगे, हम जीतकर आजादी लेंगे, हमारा आजादी पर हक है।” इससे भी आश्चर्यजनक बात यह है कि वे कश्मीर के अलावा केरला और बंगाल की भी आजादी की मांग कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि ये छात्र देश के सभी राज्यों को देश से अलग करना चाहते हैं। ऐसा लग रहा है कि ये छात्र चाहते हैं कि सभी राज्य खुद को भारत से अलग करने की मांग करने लगें और देखते ही देखते भारत के टुकड़े हो जायं। सोशल मीडिया, फेसबुक और ट्विटर पर जेएनयु की जमकर आलोचना की जा रही है। यह वीडियो देखकर देश से प्रेम करने वालों का रोम रोम गुस्से से भर उठा है। फेसबुक पर ShutDownJNU ट्रेंड चलाकर JNU को बंद किये जाने की मांग की जा रही है।

jnu04-11216अमेरिका और भारत पाकिस्तानी आतंकवादी हाफिज सईद को मोस्ट वांटेड की श्रेणी में रखते हैं। आपको जानकार आश्चर्य हो सकता है कि हाफिज सईद भी कश्मीर की आजादी की मांग करता है और बिलकुल ऐसे ही नारे लगाकर भारत में जेहाद करने का ऐलान करता है जैसा कि JNU के छात्र कर रहे हैं। अगर JNU के छात्र भी हाफिज सईद जैसे नारे लगा रहे हैं तो इन छात्रों और हाफिज सईद में फर्क क्या है।  यही कहा जा सकता है कि भारत को हाफिज सईद को तलाश करने की जरूरत नहीं है, JNU के छात्र ही कह रहे हैं हम लड़कर और जीतकर कश्मीर की आज़ादी ले लेंगे, हमारे हर घर में अफजल गुरु और मकबूल जैसे आतंकवादी पैदा होंगे। हाफिज सईद के बाप तो नयी दिल्ली में ही बैठे हैं।

jnu06-11216जेएनयू में प्रारम्भ से ही लगभग वामपंथी वर्चव रहा है। जनता को भ्रमित करना कम्युनिस्टों का धेय रहा है। इनके बुद्दिजीविओं ने हमेशा भारत की संस्कृति को धूमिल ही किया है। देश के वास्तविक इतिहास को दरकिनार कर छद्दम इतिहास से अवगत करवा कर देश में शिक्षितों को भी इतिहास में अशिक्षित बनाकर रख दिया। वास्तविक इतिहास को सार्वजनिक करने वालों को दूसरी पार्टिओं के छद्दम नेताओं के साथ स्वर मिला कर साम्प्रदायिक करार करवाने में सफल हो जाते हैं। यही कारण है कि फ़रवरी 9 को कल्चरल शाम के खिलाफ शिकायत होने के कारण इस प्रोग्राम को “द कंट्री विदआउट अ पोस्टऑफिस “मार्च में कश्मीर और भारत सरकार विरोधी नारों का जो नंगा नाच खिला, लेकिन गोधरा, दादरी  और रोहित की मौत पर तांडव करने वाले छद्दम नेता समाज में मातम छा गया अब किसी की कोई आवाज़ नहीं निकल रही।

jnu03-11216JNU में चल रहे नंगे नाच ने मेरी सोच को और पुष्ट कर दिया है कि “गजवा-ए-हिन्द” होकर रहेगा इसलिए नहीं कि इसका ज़िक्र आसमानी किताब में है और जो कुछ आसमानी किताब में लिखा होता है वो सच ही होता है बल्कि आप लोग भी गौर कीजीये जो कुछ आसमानी किताब में लिखा होता है अगर वो ना होता दिख रहा हो तो शांतिदूत सच साबित करने में एडी चोटी का जोर लगा देते है और दुनियाँ की नज़रों में आसमानी किताब के एक एक हर्फ़ को सही साबित करने के लिए खुद अपने शरीर के चीथड़े उड़ाने से भी गुरेज नहीं करते हैं, इस बात को हम और जय भीम का नारा लगाने वाले जितना जल्दी समझ जाए उसमे ही हिंदुओं की, इस देश की,दुनियाँ की भलाई है.

jnu05-11216दरअसल “जय मीम जय भीम” तो सबसे अंतिम ब्रह्मास्त्र है यानि हाइड्रोजन बम है अख़लाक़,दादरी, असहिष्णुता, वेमुल्ला, JNU वगैरह वगैरह तो AK-47 जैसे छोटे छोटे हथियार है जो अन्दर ही अन्दर आपको नुक्सान पहुंचाएंगे आपकी राजनैतिक सोच को या तो कुंद कर देंगे या उसको बदलकर रख देंगे, अगर आप राजनैतिक रूप से तटस्थ भी हो गए तो समझ लीजीये आपने देशद्रोहियों/गजवा-ए-हिन्द के झंडा बरदारों को प्रोटीनेक्स का इंतजाम कर दिया है आप जैसे दस बीस परसेंट लोग भी तटस्थ हो गए तो समझ लीजिये ये देश गया.

बहरहाल मैं “जय मीम जय भीम” को हाइड्रोजन बम इसलिए मानता हूँ क्योंकि मैं जानता हूँ कि अगर यह नारा ओवैसियों की बजाय किसी छायावती टाईप के धूर्त ने दिया होता तो कुछ सालों के लिए यह संभावना रहती कि मुल्ला(यम) टाईप का अर्ध शांतिदूत इसको फिर से हथिया लेगा लेकिन इसबार यह नारा जिधर से आया है अगर उसे इन भीमों की मदद से सत्ता मिल गई तो अगर किसी ने हुकूमत को हथियाया भी तो हथियाना वाला इतिहास में दुबारा कोई कोई जय भीम नहीं सिर्फ और सिर्फ जय मीम ही होगा और जब जय मीम होगा तब JNU जैसे संस्थानों में भयानक नंगे नाच का खाका मन में तो खींचा ही जा सकता है.

jnu07-11216इसलिए हम सभी को यथाशक्ति इसका विरोध करना चाहिए और तथाकथित मूल निवासियों को भी किसी तरह समझाना चाहिए कि जब हम खत्म होंगे तो इन्ही शांतिदूतों के हाथों तुम और भी जल्दी खत्म हो जाओगे, नेताओं को भी अब समझ लेना चाहिए कि सत्ता सुख से ऊपर देश है अगर मोदी सरकार इन देशद्रोहियों से ढंग से और कर्रे तरीके से निबटने में असफल या उदासीन रहती है तो हमारी आने वाली पीढीयाँ सीरीया,ईराक,अफगानिस्तान जैसे दारुण दुःख भोगेगी और हमें बचाने वाला कोई नहीं होगा।