अमेरिका में अफसरों को वीजा पावर मिलने से आईटी सेक्टर की शामत

बेंगलुरु। ट्रंप सरकार ने अपने अधिकारियों को मनमाने ढंग से फ्रेश एच-1बी वर्क वीजा या उसके एक्सटेंशन के आवेदन को खारिज करने के अधिकार देने का फैसला किया है। भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियां इस फैसले को अपने लिए खतरे के रूप में देख रही हैं। भारत की सबसे बड़ी टेक्नॉलजी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और उसकी प्रतिद्वंद्वी इंफोसिस कहना है कि अमेरिका में उनका बिजनस फिर से बढऩा शुरू हुआ है।

वहां की कंपनियां बड़े टेक्नॉलजी प्रॉजेक्ट पर अब पैसा खर्च कर रही हैं। भारतीय आईटी कंपनियों की आमदनी में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब दो तिहाई है। यूनाइटेड स्टेट्स सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) की अपडेटेड पॉलिसी में अधिकारियों को रिच्ेस्ट फॉर एविडेंस (आरएफई) या नोटिस ऑफ इंटेंट टु डिनाय के बिना वीजा आवेदन को खारिज करने की इजाजत दी गई है। यह पॉलिसी 11 सितंबर से लागू होगी। इससे इमिग्रेशन अफसरों को डॉक्युमेंट ठीक नहीं लगने पर संबंधित शख्स को डिपोर्ट करने का भी अधिकार होगा।

कुछ हफ्ते पहले एक और अधिसूचना जारी की गई थी। इसमें अधिकारियों को वीजा रिन्युअल होने का इंतजार कर रहे शख्स को नोटिस टु अपीयर (एनटीए) जारी करने का अधिकार दिया गया था। अगर यह नोटिस जारी किया जाता है तो वीजाधारक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। नैस्कॉम के वाइस प्रेजिडेंट शिवेंद्र सिंह ने बताया, ‘अब किसी के लिए भी एक्सटेंशन मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि एनटीए के खिलाफ अपील का अधिकार तो रहेगा, लेकिन उस दौरान वह शख्स काम नहीं कर पाएगा।

2016 में अमेरिका ने 3,45,262 एच-1बी वीजा आवेदनों को मंजूरी दी थी, जिनमें से केवल 33 पर्सेंट या 1,14,503 ही शुरुआती रोजगार या वर्क वीजा पर पहली नौकरी के लिए थे। वहीं, बाकी के 67 पर्सेंट पहले तीन वर्षों से अधिक वीजा एक्सटेंशन के लिए थे या फिर आवेदक अमेरिका में एंप्लॉयर के बदलाव की मांग कर रहे थे। यूएससीआईएस ने कहा कि 2017 में एच-1बी वीजा के लिए मंजूर आवेदनों की संख्या 3,64,584 थी। यूएस इमिग्रेशन रूल अधिकतम छह साल के लिए एच-1बी वीजा की इजाजत देते हैं। एच-1बी वीजा धारकों में भारतीयों की संख्या करीब 70 पर्सेंट है।

नैस्कॉम अध्यक्ष देबजानी घोष ने हाल ही में बताया था कि इंफोसिस, विप्रो और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी आईटी फर्मों के फ्रेश एच-1बी आवेदन पहले से कम हैं। भारतीय कंपनियों को केवल 12 पर्सेंट ही वीजा जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक फायदा अमेरिकी कंपनियों को मिला है। नैस्कॉम ने कहा कि ट्रंप सरकार की नई पॉलिसी से अमेरिकी इनोवेशन पर बुरा असर पड़ेगा।