जांच हुई तो स्कूली वाहन हो गए आधे

मेरठ। स्कूली वाहनों के सत्यापन के दूसरे राउंड में रविवार को 362 बसों का निरीक्षण किया गया। आरटीओ कार्यालय में 13 सौ बसें रजिस्टर्ड हैं लेकिन अभी तक केवल 622 बसों की जांच हो पाई है। स्कूल प्रबंधन ने खटारा बसों को जांच के लिए भेजा ही नहीं। अब आरटीओ के अधिकारी स्कूल में पहुंचकर खटारा स्कूली वाहनों की जांच कर चालान, सीज करने की कार्रवाई करेंगे। अधिकारियों ने कहा कि मानक को पूरा नहीं करने वाले एक भी स्कूली वाहन का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।

रविवार को आईटीआई पार्क साकेत में दूसरे राउंड में स्कूली वाहनों का सत्यापन किया गया। इन स्कूली वाहनों की जांच में इमरजेंसी दरवाजे जाम, प्राथमिक उपचार किट, स्पीड गवर्नर, चालक-परिचालक का मोबाइन नम्बर और नाम दर्ज नहीं होने के साथ वर्दी नहीं होने की खामियां मिली हैं। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर इन खामियों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। दोपहर तक चले सत्यापन के दौरान स्कूली बसों से प्रभात नगर के पास के इलाकों में जाम की स्थिति बन गई। बताया कि 52 स्कूली बसों में थोड़ी बहुत कमियां पाई गई हैं। इन 52 बसों में कमियों को दूर करने के लिए एक सप्ताह का समय देते हुए नोटिस दिया है। वाहनों में फुट रेस्ट न होना, किस बस में पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी न लिखा होना या कुछ में इमरजेंसी गेट का सही तरीके से न खुलना आदि शामिल हैं।

कई स्कूली वाहन ऐसे थे जिनकी एनसीआर में चलने की मियाद पूरी हो चुकी है। इन वाहनों के स्टे की सूची मांगी गई है। इस सूची में शामिल स्कूली बसों को संचालन की अनुमति दी जाएगी। जिन पर स्टे नहीं इनके चालान कर सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।

कमजोर नजर के हाथों में स्टेयरिंग

स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों की टीम ने 137 वाहन चालक-परिचालकों की जांच की। इनमें से 36 ड्राइवरों की नजर कमजोर मिली हैं। नजर कमजोर वाले ड्राइवरों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। इनको चश्मे का नंबर दिया जाएगा। साथ ही इनको वाहन चलाने पर रोक लगा दी है। भीड़ ज्यादा होने की वजह से कुछ बिना जांच के निकल गए।

बाहरी वाहनों पर कार्रवाई तय

विद्यालय में संचालित, पंजीकृत सभी वाहनों के चालक, परिचालकों का आधार कार्ड, परिचय पत्र विद्यालय के कार्यालय में जमा कराया जाए। उनका चरित्र सत्यापन, फोन नम्बर संबंधित वाहनों पर मोटे अक्षर में अंकित हों। विद्यालय के सामने सौ मीटर की परिधि में नो पार्किंग जोन के बोर्ड लगाए जाएं। बच्चों के माध्यम से अभिभावकों को डेली डायरी में उनकी सुरक्षा, असुविधा के लिए सूचित करें।

Leave a Reply