मैं अपने हर फैसले से खुश हूं: चित्रांगदा

अपनी पहली फिल्म हजारों ख्वाहिशें ऐसी में जबरदस्त अभिनय के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह काफी अरसे से सिल्वरस्क्रीन से दूर थीं। हालांकि, अब वह जल्द ही बड़े पर्दे के साथ छोटे पर्दे पर भी नजर आने वाली हैं। बच्चों के डांस रिऐलिटी शो डीआईडी लिटिल मास्टर्स से टीवी पर डेब्यू कर रहीं चित्रांगदा ने हमसे की बातचीत।

आप काफी समय से रुपहले पर्दे से दूर थीं। इसकी क्या वजह रही?

मैं कुछ पर्सनल दिक्कतों से गुजर रही थी, तो ऐसे में काम से ध्यान हट जाता है। आप इतने कमिटेड नहीं फील करते हो। आपकी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। मैंने काम से ब्रेक ले लिया था, जिससे इंसान एक तरह से सबसे डिस्कनेक्ट हो जाता है। फिर, जब आप दोबारा इंडस्ट्री में आते हैं, तो सही मौका मिलने में और सही प्रॉजेक्ट मिलने में वक्त लगता है। यही वजहें थीं।

लेकिन अब आप एक साथ चौतरफा कमबैक कर रही हैं। फिल्में भी कर रही हैं, टीवी पर नई पारी शुरू कर रही हैं, वहीं प्रॉडक्शन में भी हाथ आजमा रही हैं। फिल्म बनाने का खयाल कैसे आया?

जब मैं ब्रेक पर थी, तभी मेरी मुलाकात पूर्व हॉकी कप्तान संदीप सिंह से हुई। जब मुझे उनकी कहानी पता चली कि वर्ल्ड कप के ठीक पहले इतनी बड़ी दुर्घटना का शिकार होने के बावजूद उन्होंने दोबारा टीम में जगह बनाई, तो मुझे लगा कि यह जो हमारे देश के रियल हीरो हैं, उनकी कहानी पर्दे पर आनी चाहिए। यहां से उन पर फिल्म बनाने की सोच दिमाग में आई। कहानी लिखी गई, फिर मैंने पिच किया और बात बन गई। अब जल्द ही वह फिल्म सूरमा आप लोगों के सामने होगी।

एक ऐक्ट्रेस, प्रड्यूसर और सिंगल मदर के तिहरे रोल में तालमेल कैसे बना रही हैं? और यह सामंजस्य बैठाना कितना मुश्किल है?

यह बहुत मुश्किल है, लेकिन जहां तक प्रॉडक्शन का सवाल है, उसमें मेरे एक पार्टनर भी हैं। मैं अकेली नहीं हूं। मैं अभी सीख रही हूं और यह बहुत एक्साइटिंग है। हां, मैं फिल्में भी कर रही हूं। उम्मीद है कि आपसे जल्द मिलूंगी और उसके बारे में बात करूंगी। अभी हम डीआईडी लिटिल मास्टर्स के बारे में बात करते हैं। यह एक तरह से मेरा दूसरा डेब्यू है, तो मैं बहुत एक्साइटेड हूं और उम्मीद करती हूं कि लोग इसमें भी मुझे पसंद करें।

ठीक है, आपके टीवी डेब्यू के बारे में बात करते हैं, तो ऑफर्स तो आपको पहले भी आए होंगे। इस शो से टीवी पर आने का फैसला करने की वजह?

पहले मुझे कॉमिडी शोज जज करने के ऑफर्स आए थे, लेकिन मैंने कभी कॉमिडी की नहीं है। इसीलिए, मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं कॉमिडी शो जज के लिए फिट बैठती हूं। फिर, जब डीआईडी लिटिल मास्टर्स आया, तो मैं बहुत एक्साइटेड हो गई, क्योंकि मुझे डांस बहुत पसंद है। हालांकि, मैंने जो फिल्में की हैं, उसमें इतना डांस नहीं था, लेकिन फिर मैंने कुछ ऐसे डांस वाले गाने किए हैं, तो मैं बहुत एक्साइटेड थी एक डांस शो का हिस्सा बनने के लिए। इन शोज में ये नहीं होता कि आप केवल बैठकर जज कर रहे हो, बल्कि प्रतियोगी वहां बहुत ही इमोशनल, बहुत ही रियल स्टोरीज लेकर आते हैं। मुझे उनके इस सफर का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा। फिर, इस वक्त टीवी की जो पहुंच है, आप उसका मुकाबला ही नहीं कर सकते। आप चाहे कितनी भी फिल्में कर लें, लोग एक दिन जाकर देख आएंगे, लेकिन यहां आप हफ्ते में दो दिन उनके बेडरूम में हैं। उसके अलावा रिपीट शोज हैं। मुझे लगा कि एक ऐक्टर के तौर पर मुझे अपने दर्शकों के साथ इस तरह का कनेक्ट बहुत जरूरी है। इसलिए यह परफेक्ट शो है।

अब तक इस डांस शो के जज कोरियोग्राफर्स रहे हैं। ऐसे में बतौर अभिनेत्री आप क्या अंतर लाएंगी?

अंतर तो चैनल लाएगा। चूंकि मैं एक ऐक्टर हूं। मैंने थोड़ी-बहुत डांसिंग की है। थोड़ा-बहुत डांस सीखा भी है, तो वे चाहते हैं कि मैं एक ऐक्टर के तौर पर जज करूं कि यह आपको कंप्लीट परफॉर्मेंस लगती है या नहीं। यह मेरा दूसरा डेब्यू है, तो मैं पूरी कोशिश कर रही हूं कि अपनी एक छाप छोड़ पाऊं। तो मैंने बहुत सारी वर्कशॉप्स कीं।

जैसा आपने शो में इमोशनल स्टोरीज की बात कही। यह एक किस्म से हर रिऐलिटी शो का फंडा सा हो गया है। टैलंट के अलावा इमोशनल स्टोरीज जरूर होती हैं? क्या कहना चाहेंगी?

हमें ऐसा लगता है कि हम बहुत इम्यून हो गए हैं, इन स्टोरीज को देख-देखकर, लेकिन असल में स्टोरीज तो अभी भी वही हैं। उनके पास उसी तरह की स्टोरीज आती हैं, तो वे वही दिखा सकते हैं। हमने खुद करीब डेढ़ सौ ऑडिशन लिए, जिसमें 60 पर्सेंट की बहुत ही इमोशनल स्टोरीज थीं। हमारा भारत यही है। हम मुंबई में रहते हैं। आप रिपोर्टर हैं। मैं ऐक्टर हूं, तो हमें लगता है कि यार, ये क्या मसाला दिखा रहे हैं, लेकिन यही सचाई है। हम जितना भी इसे ड्रामा कह लें, लेकिन यही हमारा समाज है। हम एक बुलबुले में रहते हैं और हमें लगता है कि अरे यार ये तो स्क्रिप्टेड है, लेकिन वह स्क्रिप्टेड नहीं होता। एक महिला सच में बर्तन बेचती है, जिसका बच्चा कमाल का डांस करता है। यह सचाई है। अबआपको क्या लगता है आपकी मर्जी !

अक्सर ऐसा होता है कि शादी या मां बनने के बाद महिलाएं काम से ब्रेक ले लेती हैं। आप इस फैसले को कैसे देखती हैं?

यह बिल्कुल ठीक है। इसमें कुछ गलत नहीं है। यह उस इंसान पर निर्भर करता है कि वह क्या करना चाहता है। जो उनको ठीक लगता है, जो भी उनको खुशी देता है, मेरे हिसाब से वही फैसला उनके लिए आदर्श है। मैं इसमें यकीन नहीं करती कि दुनिया की सबसे कामयाब महिला क्या कह रही है? यह मेरे ऊपर है कि मैं क्या कर रही हूं। सकता है कि जो आपके लिए कारगर साबित हुआ, वह मेरे लिए ना हो। मेरे लिए यही सही था।

आपने काम से ब्रेक लेने का फैसला लिया। इस फैसले को कितना सही मानती हैं?

मैंने अपनी जिंदगी में जो भी फैसले लिए हैं, मैं उनसे बहुत खुश हूं।