हाय रे! मिर्ची…

ललित शौर्य

मिर्ची का नाम सुनते ही मुंह में तीखेपन का एहसास होने लगता है। जीभ लपलपाने लगती है। मिर्ची का अचार ओये होये सोचते ही मुख समंदर बन जाता है। पर जब मिर्ची लगती है तो गुस्सा सा आने लगता है। माथा ठनक जाता है। आँखें लाल हो जाती है। मिर्ची लगना और मिर्ची लगाना दिनों में जबर्दस्त अंतर है। कुछ लोगों का शौक मिर्ची लगाना है। देखा जाए तो मानव स्वभाव ही मिर्ची लगाना है। आजकल हर बंदा अगले बन्दे को मिर्ची लगाना चाहता है या मिर्ची लगा रहा है। सरकार नए-नए फैसलों से विपक्षियों को मिर्ची लगा रही है। विपक्ष सरकार का विरोध कर के उन्हें मिर्ची-मिर्ची करना चाहता है। विधायक -मंत्री बड़ी-बड़ी गाड़ियों, उड़नखटोलों में जब घूमते हैं तो अप्रत्यक्ष रूप से जनता को मिर्ची लगती है। युवाओं में मिर्ची लगाने का शौक चरम पर है।

कॉलेज जाते ही लड़के और लड़कियां एक दूसरे को अपनी गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड दिखा-दिखा कर मिर्ची लगाते हैं। फेसबुक पर लोग अपने छोटे-मोटे कामों को इस तरह से लिखते और दिखाते हैं जैसे की वो बहुत बड़ा कारनामा हो। दरसल उनकी ये मेहनत अपने विरोधियों को मिर्ची लगाने के लिए होती है। घर परिवार में सास और बहू एक दूसरे को मिर्ची लागाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। पड़ोसी अपने पडोसी को मिर्ची लगाने का मौक़ा खोजते रहते हैं। जब पता चलता है कि पडोसी का लड़का एग्जाम में फेल हो गया है तो वो उनके घर मिठाई का डब्बा लेकर धमक जाते हैं। और अपने लड़के या भतीजे के फर्स्ट डिवीजन की मिठाई उनके मुंह में ठूंस आते है। ये भी अजूबा है। अगले के मुंह में मिठाई ठूंसे जाने के बाद भी वो मिर्ची से जल उठता है।मिर्ची राष्ट्रीय पार्टियां एक दूसरे को खूब लगाती हैं। जिसको टी वी डिबेट पर देखा जा सकता है। हमारे देश का राष्ट्रीय एजेंडा भी मिर्ची लगाना है।

पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक कर हमें उसे मिर्ची लगा चुके हैं। भारत की कूटनीति ने चीन को ऐसी मिर्ची लगाईं की उसे सिसकी लगाते हुए डोकलाम से पैर पीछे खीचने पड़े। मिर्ची लगाने का काम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जा सकता है। उत्तर कोरिया का तानाशाह परमाणु परीक्षण करके सारे विश्व को मिर्ची लगा रहा है। अमेरिका भी मारे मिर्ची के सी-सी कर रहा है। कभी अमेरिका , रूस को मिर्ची लगाता है। तो कभी अमेरिका को रूस से मिर्ची लगती है। यानेकी ये मिर्ची लगने और लगाने का खेल हम भारतीयों के बीच ही प्रचलित नहीं है, बल्कि विश्व समुदाय भी इसे खेलना बखूबी जानता है। मिर्ची का स्तर इतना व्यापक होगा कभी सोचा ना था। अब तो मिर्ची देखकर ही उसे नमस्कार करने का मन करता है। कितनी बड़भागी है मिर्ची जो हर वक्त हर किसी के दिल में रहती है। किसी के जियरा में मिर्ची लगी है तो कोई किसी के जियरा में मिर्ची घोल रहा है। हम तो ये सब देखकर ही बोल उठते हैं, हाय रे! मिर्ची….