हालात ठीक नहीं….

राज शेखर भट्ट

राज्य गठन के सोलह साल पूरे होने को हैं लेकिन प्रदेश में काबिज हो चुकी सरकारें अब तक कुछ खास नहीं कर सकी हैं। हालांकि कांग्रेस व भाजपा दोनों सरकारों ने नारे तो बहुत दिये पर उन नारों को धरातल में उतार नहीं सके। राज्य बनते ही तत्कालीन सरकार ने उत्तराखण्ड को ऊर्जा प्रदेश के रूप में प्रचारित किया। यह कैसा ऊर्जा प्रदेश है? जहां के सैकड़ों गांवों के लोग आज भी बिजली के पोल लगने का इंतजार कर रहे हैं। पोल लग भी जायें तो तारें नहीं बिछी और तारें लगने के बाद भी बिजली नहीं। दूसरी तरफ प्रदेश को जड़ी-बूटी प्रदेश बनाने का वादा किया गया। कांग्रेस व भाजपा दोनों ही सरकारों ने कदम तो उठाये, परन्तु वह कदम कितने कारगर साबित हुये? हिमाचल अपने जन्म के बाद से बागवानी के क्षेत्र में आगे बढ़ा। आज वहां की स्थिति यह है कि वह बागवानी के क्षेत्र में शत-फीसदी सफलता अर्जित कर चुका है। दूसरी ओर उत्तराखण्ड की स्थिति बागवानी के क्षेत्र में ना के बराबर है।

पर्यटन उत्तराखण्ड में बेशुमार है, सरकार का कदम भी सराहनीय है, परन्तु पर्यटन से संबंधित क्या कोई मास्टर प्लान है? प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन आदि की तमाम समस्यायें मुंह बाये खड़ी हैं। जिस कारण पलायन बढ़ता ही जा रहा है और देश की रीढ़ कहे जाने वाले गांव समाप्ति की ओर है।मुख्यमंत्री व मंत्रीगण केवल थोथी घोषणायें ही कर रहे हैं। आसमान से चांद तोड़कर लाने जैसी बातें कह, जनता को बरगलाने के प्रयास जारी हैं। भाजपा व कांग्रेस ही नहीं उत्तराखण्ड क्रान्ति दल भी राज्य के वासियों के दुःख दर्दों पर घडि़याली आंसू तो बहा देता है लेकिन प्रदेश वासियों को भला कैसे होगा? इस तरह का कोई ठोस कदम नहीं उठा पाये हैं।

editorial26may17इसी बात को जारी रखते हुये इतना भी जरूर कहूंगा कि कुछ ही समय पूर्व डीडीहाट विधानसभा का दौरा करने के बाद पता चला कि कौन विधायक कैसा है। अंततः परिणाम यही आया कि जो जनता को पसंद नहीं था, जिसने कई साल अपनी विधानसभा में काट दिये, जनता के लिए कुछ नहीं किया, वही चुनाव जीत रहा है। चुनावी सरगर्मिया बढ़ी तो नेताओं के रूबाब तो देखो, हर वोटर को शराब, शबाब और कबाब से तोल रहे हैं। क्या यही विकास है? क्या यही राजनीति है? क्या यही नेता का वास्तविक रूप है?

बहरहाल प्रतिदिन गिरगिट की तरह रंग बदल रहे नेताओं को फिर जन दरबार में पहुंचना है। तब जनता के हाथ में हथियार होगा। यदि जनता ने उस हथियार का सोच-समझकर प्रयोग किया तभी उनका भला होगा, अन्यथा फिर वही राग दोहराया जायेगा।