प्राइमरी में इंग्लिश

उत्तर प्रदेश में अप्रैल से शुरू होने जा रहे अगले शिक्षण सत्र में बेसिक शिक्षा परिषद प्रदेश के तकरीबन 1 लाख 13 हजार प्राथमिक विद्यालयों में से पांच हजार को इंग्लिश मीडियम बनाने जा रही है। जनवरी के पहले हफ्ते में इसका आदेश जारी किया जा चुका है, जिसके तहत ब्लॉक लेवल पर चयनित पांच-पांच प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई इंग्लिश मीडियम से होगी। प्रत्येक स्कूल में पांच टीचर्स तैनात होंगे, जिन्हें बाकायदा अंग्रेजी लिखने-बोलने का टेस्ट पास करने के बाद पढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्राइमरी स्कूलों में अभी तक अंग्रेजी की पढ़ाई कक्षा तीन से शुरू होती थी जो चयनित स्कूलों में अब सीधे कक्षा एक से शुरू होगी।

कक्षा 3 से कक्षा 8 तक के तकरीबन 46 हजार उच्च प्राइमरी स्कूलों में अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक रेनबो (इंद्रधनुष) पढ़ाई जाती है। इसके भी कंटेंट में सुधार किया गया है। अंग्रेजी का डर बच्चों में न बैठे, इसके लिए इसमें स्थानीय भाषा का भी पुट दिया गया है। प्राइमरी के बच्चों को इंग्लिश सिखाने की दिशा में प्रदेश सरकार का यह दूसरा बड़ा कदम है। इससे पहले अप्रैल 2015 से हर जिले में कम से कम दो प्राइमरी स्कूलों में कक्षा एक से अंग्रेजी की पढ़ाई का प्रॉजेक्ट शुरू किया गया था। इसके तहत प्रदेश के 75 जिलों में 750 शिक्षकों को अंग्रेजी के मोर्चे पर तैनात किया गया था। नए आदेश के बाद इनकी संख्या बढ़कर 25 हजार के आसपास हो जाएगी। इंग्लिश के पिछले प्रॉजेक्ट में शिक्षकों ने जो उत्साह दिखाया, परिषद को उससे बड़ी ऊर्जा मिली है।

नए शिक्षकों में से अधिकतर कॉन्वेंट में पढ़े हैं तो इस प्रॉजेक्ट में उनका ज्ञान दब जाने की कुंठा जाती रहेगी। लेकिन इसका सबसे ज्यादा फायदा बच्चों को मिलनेवाला है, जो अचानक अंग्रेजी में लिखा कोई शब्द सामने आ जाने पर ब्लैकबोर्ड के उस पार देखने लगते थे, जबकि अंग्रेजी मीडियम से आए सहपाठी उनके साथ बैठने के बजाय दूसरी बेंच देखते थे। कोर्स में क्या होगा, इसकी तस्वीर अभी साफ नहीं है। पिछले प्रॉजेक्ट में प्रदेश के आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान और राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद ने मौजूदा किताबों को ही इंग्लिश में ट्रांसलेट करा दिया था। इस बार इन्हें किताबों के लिए पूरा वक्त मिला है तो उम्मीद की जा सकती है कि पढ़ाई के दौरान बच्चों को अंग्रेजी के मिजाज का भी कुछ अंदाजा मिलेगा।