चोटी ना रही हमार…

ललित शौर्य

चोटी होना कोई बड़ी बात नहीं पर चोटी ना होना कितनी बड़ी बात है जरा उस महिला से पूछो जिसकी ताजा -ताजा चोटी , छोटी हुई है। अर्थात चोटी को चोट पहुची है, मतलब चोटी काटी गई है।चोटी कोई अपनी मर्ज़ी से नहीं कटवाता। वो जबर्दस्ती या चुप-चाप चोरी छिपे काटि जाती है। चोटी कटना चमत्कार है या अफवाह ये शोध का विषय है। देश के बड़े-बड़े मिडिया संस्थान और देश की पुलिस इस पर शोध कर रही हैं। चोटी से चमत्कार है। चोटी होने पर महिलायें सुन्दर दिखती हैं। चोटी महिलाओं का श्रृंगार है। उनका गहना है। चोटी ना होने पर वो बिना खुश्बू के फूल सी लगती हैं। इसलिए उनको अपनी चोटी से लगाव होता है। आज देश में चोटी कटने की घटनाएँ धड़ल्ले से घटित हो रही हैं। जितनी सीटें केजरीवाल जी को दिल्ली में मिली थी उससे कई ज्यादा मामले चोटी कटने के हो चुके हैं। भारत चमत्कारों का देश है। यहाँ चमत्कार को नमस्कार है। पर इस चमत्कार पर सबके चेहरे पर आक्रोश है। ये चमत्कार नहीं अफवाह या फिर साजिश या दशहत फैलाने की कोई चाल है। इस चाल की खाल तक अभी कोई नहीं पहुंच पाया है।अपने देश में चोटी का महात्म्य बहुत पुराना है। अपने यहाँ  तो पुरुष भी चोटी रखा करते हैं। चाणक्य की चोटी से सभी परिचित हैं।

चोटी उनकी आन-बान-शान थी। उसी चोटी का संकल्प लेकर उन्होंने कई राज विद्रोहियों को ध्वस्त किया उनको पस्त किया। आज चोटी कर्तन करने वालों ने पुलिस की नाक में दम किया है।चोटी महिमा हर न्यूज चैनल पर दिखाई जा रही है। अखबारों की हेडिंग चोटी पर लिखी गई है। चोटी की टीआरपी चोटी पर है। आजकल चोटी वाली महिलाएं घबराई हुई हैं। वो चोटी छुपाकर चल रही हैं। कई चोटी पर नींबू-मिर्ची लटकाए चल रहीं हैं। ताकि किसी साये का भी साया ना पड़ सके। कोई घर के दरवाजों के पास मेंहदी की छाप लगाए हुए है। ताकि चोटी कटर अंदर एंट्री ना कर सके। चोटी की सुरक्षा में घर के मर्द लगे हुए हैं। रात भर उनकी आँखें चोटी पर टिकी हुई हैं। कई महिलाएं चोटी की सुरक्षा के लिए इतनी गंभीर हैं कि वो हेलमेट लगाकर सो रही हैं। चोटी की सुरक्षा में एड़ीचोटी का जोर लग रहा है। चोटियां अब बंदूकों  की सुरक्षा में हैं। यू .पी, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली आदि राज्यों में चोटी को छोटी करने की घटनाएं हुई हैं। व्हाट्स एप्प फेसबुक पर धड़ल्ले से चोटी कर्तन पर पोस्टें सरकाई जा रही हैं। अफवाएं फैलाई जा रही हैं। अब चोटी कटना इत्तेफाक है, साजिश है, चमत्कार है ये तो समय बतायेगा। अपने देश में समय-समय पर ये सबकुछ होता रहा है।

ऐसी चमत्कार कम अफवाओं की हमें आदत है। चोटी कटर बड़ा अजीब टाइप का बन्दा/बंदी है जो चोटी तो काटता है पर ले नहीं जाता। अरे भाई तुमको चोटी से इतना ही प्यार है तो ले जाओ ना साथ में। अगला चोटी काटकर वहीँ फेंक जाता है। ताकि जिसकी चोटी कटी है बार-बार उस चोटी को देख-देखकर वो तिल-तिल तड़पें। उसको चोटी वाले दिन याद आये। जब वो अपनी चोटी से सबको रिझाया करती थी। अपनी चोटी पकड़ घुमाया करती थी। पर जब से ये चोटी बैरन छोटी हुई है कोई झांकता तक नहीं।चोटी कटर से लोग दशहत में हैं पर जरा उन सैनिकों को याद करो जो अपने शीश कटा डालते हैं पर फिर भी कभी उनके सैनिक दोस्त दशहत में नहीं आते। वो दुगने जोश के साथ डट कर मुकाबला करते हैं। और इधर एक आप हैं जो केवल अफवाहों से ही पैंट गीली कर बैठे हैं। उनकी तो सुनो जो चोटी कटायें बैठी हैं बस गुनगुना रहीं हैं चोटी ना रही हमारा, बैरन हुई हमारा, दुश्मन हुई हमारा…