व्यंग्य : बोलो, विवादित बोल

ललित शौर्य

राजनीति में जो जितना बोलता है वो उतना चलता है। और जो जितना विवादित बोलता है वो उतना ही तेज दौड़ता है। इसलिए राजनीति के चाहने वाले विवादित बोलते हैं। कई तो ऐसे हैं जो विवादित खाते, विवादित पीते हैं। तथा उनका सोना -जागना सब विवादित ही होता है। बड़बोलों और विवादित बोलों का हर पार्टी में विशेष सम्मान होता है। या ये कहें कि हर पार्टी विवादित बोलने वालों को विशेष तवोज्जो देती है। आज के समय में जनता मीठे बोलों को नहीं सुनती , अब सब को आदत विवादित सुनने की हो गई है। इसमें बेचारी जनता का कोई कसूर नहीं क्योकि वो न्यूज़ चैनलों में विवादित बोल सुनती है, अखबारों में विवादित बोल पढ़ती है और फिर चुनावों में विवादित नेता को जितवाती है। अब जब उसके आस पास सबकुछ इतना विवादित हो तो उसे सामान्य से कैसे लगाव होगा। आज के नेताओ ने निम्न पंक्तियों को अपना लिया है:-“ऐसी वाणी बोलिये अपना आपा खोय, अपना तो हो भला, चाहे अगला रोय”। उनका इन पंक्तियों के प्रति लगाव भी स्पष्ट देखा जा सकता है। टी. वी. हो या कोई रैली सब जगह नेताजी टाइप लोग आपा खो कर ही बात करते हैं। उन्हें तो बोलते -बोलते आपा के पापा का भी पता नहीं होता। और वो इतना बोल जाते हैं कि खुद को ब्रेकिंग न्यूज, अखबारों की हेडिंग और न्यूज डिवेट में पाते हैं। विवादित बोलों को टी. वी. एंकर द्वारा बोल -बोल के सहज बना दिया जाता है। जिसे लोग एक बार सुनना नहीं चाहते थे उसे पचासों दफे बोला जाता है।

इस तरह एक विवादित बोल का गला घोंट दिया जाता है और इसे एक सामान्य बोल बनने पर मजबूर किया जाता है। राजनीति में जो विवादित नहीं बोलते समझिये वो राजनीति में कच्चे है, कूटनीति में बच्चे हैं।इसलिए एक अच्छा नेता सुबह नहा धोकर माँ सरस्वती से प्रार्थना करता है कि कम से कम आज दिन भर में वो एक बार तो कुछ विवादित बोले। जिससे उसका दिन धन्य हो जाए। वो टी. वी.- अखबारों में छा जाए। जो विवादित है वो दबंग है। उसकी छवि हाई क्लास की है। वो ख़ास है। बड़े नेताओं के बेहद पास है।राजनीति के स्कूल का पहला चैप्टर जुबान जब भी खोलो बेलगाम कर के खोलो। ज़ुबान पर अगर लगाम रही तो बिगड़ जावोगे। बर्बाद हो जावोगे। विवादों से प्यार करो। विवादों में पड़ो। विवादों से कुश्ती खेलो। हर रोज विवाद करो, विवादित बोलो और विवादों में रहो। जितने उच्च विवादित बोल समझो उतना अच्छा कैरियर। जैसे बनिया सर्फ़ बेचने के लिए बोलता है दाग अच्छे हैं। ठीक उसी तरह राजनीति में बने रहने के लिए विवादित बोलना होगा। जप रे मन विवादित बोल, मुंह खोल, विवादित बोल।