बसंत आगमन

भुवन बिष्ट

Bhuwan Bisht

जय जय वीणावादिनी,
जय वीणा की झंकार,
पीताबंर  ओढ़े है धरती,
आयी है बसंत बहार ,
सद्बबुद्धि सदमार्ग मिले ,
कृपा   मातेश्वरी तुम्हारी ,
ज्ञान का मन में हो संचार,
मिटे अशिक्षा अत्याचार,
राग द्वेष से मुक्त हो जग,
बहे प्यार खुशियों की धार,
जय जय वीणावादिनी,
जय वीणा की झंकार ,
ज्ञान ,कला ,संगीत की ,
तुम भरती हो भंडार ,
खेत खलिहानों ने भी ओढ़ी,
नयनाभिराम हैं पुष्प सुगंधित,
रंग बिरंगी , धरा पिताम्बरी,
मन में भी जागे संचार,
जय जय वीणावादिनी,
जय वीणा की झंकार,
सुख दुख का है ज्ञान कराता,
पतझड़,बसंत फिर आ जाता,
ज्ञान के चक्षु खुल जायें ,
मानव मानवता दिखलायें,
हो न जगत में अंधकार,
मानव के हृदय में जगा दे ,
सद्गगुण, साहस, सुविचार,
जय जय वीणावादिनी,
जय वीणा की झंकार ||