धारा 144 लागू किया जाना अनिवार्य

बागेष्वर। परगना मजिस्ट्रेट कपकोट कैलाष सिंह टोलिया ने बताया है कि वर्श 2015-16 में राजकीय महाविद्यालय कपकोट (असों) के छात्रसंध निर्वाचन के दौरान कतिपय असामाजिक एवं अराजक तत्वों के द्वारा अषान्ति उत्पन्न की जा सकती है जिससे छात्रसंध निर्वाचन के सफल संचालन एवं षांन्ति व्यवस्था में बाधा होने की प्रबल संम्भावना है। ऐसी स्थिति में इस धारा के अधीन कार्यवाही करने के लिए प्रर्याप्त आधार है और तुरन्त निवारण तथा षीघ्र उपचार करने के लिए धारा 144 लागू किया जाना अनिवार्य है।

उन्होंने बताया कि छात्रसंध निर्वाचन के दौरान राजकीय महाविद्यालय परिसर कपकोट (असों) के 200 मीटर की परिधि के अन्तर्गत उनके द्वारा धारा 144 लागू कर दी गई है। राजकीय महाविद्यालय परिसर कपकोट (असों) के 200 मीटर की परिधि के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति अस्त्र-षस्त्र, आग्नेयास्त्र, धारदार हथियार, लाठी डंडा, जिसका प्रयोग हिंसा के लिए या जन साधारण को डराने, धमकाने के लिए या कोई अपराध करने के लिए जैसे असामाजिक, अवांछनीय, अपराधिक कृत्य भी सम्मिलित हैं लेकर नहीं चलेगा। उन्होंनेे बताया कि यह प्रतिबन्ध ड्यूटी पर कार्यरत पुलिस, षारीािक रूप से विकलांग व अपंग व्यक्तियों तथा राजकीय सेवकों पर लागू नहीं होगा।

उन्होंने बताया कि राजकीय महाविद्यालय परिसर कपकोट (असों) के 200 मीटर की परिधि के अन्तर्गतकोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के जुलूस, प्रदर्षन एवं भाशण आदि आयोजित नहीं करेगा और न ही उत्तेजनात्मक नारों का ही प्रयोग करेगा। उन्होंने बताया कि राजकीय महाविद्यालय परिसर कपकोट (असों) के 200 मीटर की परिधि के अन्तर्गत किसी भी बाहरी व्यक्ति की प्रविश्टि निशिद होगी किन्तु यह आदेष षान्ति व्यवस्था में तैनात पुलिस बलों तथा निर्वाचन संचालन हेतु तैनात प्राधिकृत व्यक्तियों, राहगीरों पर यदि इस परिधि से आम रास्ता पड़ता हो तो लागू नहीं होगा। यदि 200मीटर की परिधि पर आवासीय मकान हो तो आवासीय भवन में रहने वालों पर यह प्रतिबन्ध नहीं रहेगा।

परगना मजिस्ट्रेट कपकोट ने बताया कि यह आदेष नामाॅकन पत्रों की जाॅच हेतु नियत दिनांक 21-09-2015 से निर्वाचन परिणाम घोशित होने के दिनांक 23-09-2015 तक लागू रहेगा। यदि इससे पूर्व ही इसे समाप्त न कर दिया जाय। इस आदेष का उल्लंघन वर्तमान में प्रवृत्त अन्य कानूनों के प्रासंगिक प्रविधानों के तहत दण्डनीय होने के कारण भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अन्तर्गत दण्डनीय है।