आर्थिक सुधार : कल्याणकारी तकाजा जरूरी

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत के बाद अर्थव्यवस्था और बाजार परिदृश्य देखें तो कई बातें उभर कर दिखाई दे रही हैं. निश्चित रूप से अब सरकार सुधार के एजेंडे पर तेजी से आगे बढ़ेगी. केंद्र सरकार सुधार के एजेंडे के तहत श्रमिकों और किसानों के साथ-साथ आम आदमी को लाभान्वित करने के लिए कल्याणकारी आर्थिक सुधारों की डगर पर तेजी से आगे बढ़ेगी. सरकार द्वारा संसद में पारित कराए गए आर्थिक सुधारों को कारगर तरीके से लागू किया जाएगा. सरकार द्वारा रोजगार बढ़ाने वाली विभिन्न योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को शीघ्रतापूर्वक कार्यान्वित किया जाएगा. इनके साथ-साथ सरकार वित्तीय सुधारों की डगर पर भी आगे बढ़ेगी. सरकार ऋण और जीडीपी के ऊंचे अनुपात को कम करने के साथ-साथ बैंकिंग सुधारों के अधूरे एजेंडा को भी पूरा करने को प्राथमिकता देते हुए दिखाई देगी.

इसमें कोई दोमत नहीं हैं कि चुनाव परिणामों के बाद शेयर बाजार में उछाल आया है. निवेशकों और कारोबारियों का विश्वास बढ़ा है. ऐसे में अब कारोबार परिदृश्य में और सुधार दिखाई देगा. पिछले दिनों भारत की अर्थव्यवस्था के संबंध में प्रकाशित हुई राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय अध्ययन रिपरेट्स भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार का परिदृश्य प्रस्तुत करते हुए दिखाई दे रही हैं. बीती चौदह दिसम्बर को प्रकाशित वैश्विक वित्तीय संगठन स्टैंर्डड चार्टर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के आर्थिक परिदृश्य में सुधार दिखाई दे रहा है. वर्ष 2017 में भारत की विकास दर 6.5 फीसदी रहेगी जबकि वर्ष 2018 में यह बढ़कर 7.2 फीसदी हो जाएगी. इस रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए तीन बड़े कारण बताए गए हैं. नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था (जीएसटी) के तहत दी गई नई सुविधाएं, बैंकों की बैलैंस शीट के मसलों को सुलझाने के लिए सक्रिय कदम तथा नोटबंदी के बाद नोटों की आपूर्ति में सुधार से कारोबारी गतिविधियों में वृद्धि.

इसी तरह ख्याति प्राप्त वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मार्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार के अच्छे संकेत मिल रहे हैं. परिणामस्वरूप देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर वर्ष 2017 की 6.4 फीसद की तुलना में 2018 में 7.5 फीसदी और 2019 में 7.7 फीसदी तक जाने की संभावना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद अब इनसे लाभ का परिदृश्य उभर रहा है. बैंक ऑफ अमेरिका मेरियल लिंच द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जीडीपी के मामले में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है.

नये चुनाव परिणामों का एक आर्थिक परिदृश्य यह भी है कि उद्योग और कारोबार से संबंधित लागों ने व्यक्तिगत आर्थिक मुश्किलों पर कम ध्यान देते हुए देश के रूप से नोटबंदी और जीएसटी की परेशानियों के बावजूद अपने आर्थिक हितों को अधिक महत्व दिया. ऐसे में वर्ष 2017 की शुरुआत में अर्थव्यवस्था को बदलाव की जो चुनौतियां झेलनी पड़ी थीं, वे दृश्य गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं, और आगे लगातार बेहतरी के आसार दिख रहे हैं. इससे देश की क्रेडिट रेटिंग में और सुधार आएगा. उल्लेखनीय है कि पिछले दो-तीन महीनों में देश की क्रेडिट रेटिंग बढऩे और कारोबार आसान बनाने से संबंधित विभिन्न अध्ययन रिपोटरे में कहा गया है कि आर्थिक मुश्किलों के बाद देश की कारोबार क्रेडिट रेटिंग बढ़ रही है.