5 साल पहले लागू कानून पर सवाल

 राज्यों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होने के संबंध में पीठ के समक्ष दस्तावेज आने के बाद मुख्य सचिवों को तलब किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 राज्यों के मुख्य सचिवों से पूछा है कि पांच साल पहले ही लागू हो चुके कानून के बावजूद उनके यहां अब तक लोकायुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं हुई है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पुड्डुचेरी, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों को लोकायुक्त न होने का दो हफ्ते में कारण बताने को कहा है। पीठ ने राज्यों से यह भी पूछा है कि उक्त राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति कब तक होगी।

शीर्ष अदालत भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अप्रैल को होगी। पीठ ने ओडिशा के मुख्य सचिव से भी पूछा है कि क्या राज्य में लोकायुक्त या उपलोकायुक्त कार्यरत है, क्योंकि शीर्ष अदालत को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

शीर्ष अदालत ने सभी 11 राज्यों से यह भी पूछा है कि एक निश्चित समय बताएं कि आखिर 2013 में ही कानून बन जाने के बावजूद वह अपने यहां लोकायुक्त की नियुक्ति कब तक कर देंगे। याचिकाकर्ता और दिल्ली के भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय के वकील गोपाल शंकरनारायणन से पीठ ने कहा कि वह इस बात का भी आकलन करें कि किन राज्यों में लोकायुक्त हैं और किन में नहीं।